गुरमीत बेदी को मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

ऊना (ममता भनोट) - जाने-माने व्यंग्यकार कवि व कथाकार गुरमीत बेदी को सोमवार को दिल्ली के हिंदी भवन में माध्यम साहित्यिक संस्थान व युवा उत्कर्ष साहित्य मंच दिल्ली एनसीआर के संयुक्त तत्वाधान में आजीवन साहित्यिक उपलब्धियों के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मान देश के प्रख्यात कथाकार बलराम, व्यंग्यकार व आलोचक सुभाष चंद्र व डॉ रमेश तिवारी, माध्यम साहित्यिक संस्थान लखनऊ के महासचिव व जाने-माने साहित्यकार अनूप श्रीवास्तव, राम किशोर उपाध्याय और देवी प्रसाद मिश्र ने प्रदान किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए बड़ी तादाद में साहित्यकार उपस्थित रहे।

 गुरमीत बेदी ने इस अवसर पर व्यंग्य की महापंचायत व कवि-कथा संगोष्ठी के दूसरे सत्र में बतौर मुख्यातिथि भी शिरकत की। हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के चंडीगढ़ स्थित  प्रेस संपर्क कार्यालय में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत गुरमीत बेदी की साहित्य की विभिन्न विधाओं में एक दर्जन से अधिक पुस्तकें और तीन उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। गुरमीत बेदी को हिमाचल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। कनाडा की विरसा संस्था भी उन्हें सामान्यत कर चुकी है। गुरमीत बेदी मारीशस व जर्मनी के बर्लिन में आयोजित वल्र्ड पोएट्री फेस्टिवल में भी हिस्सा लेकर हिमाचल प्रदेश को गौरवांवित कर चुके हैं।

उन्होंने कई देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी की हैं। उनके कविता संग्रह ष्मेरी ही कोई आकृतिष्  का जर्मन कवियत्री  रोजविटा ने जर्मनी में भी अनुवाद किया है। इस किताब की भूमिका देश के जाने माने कवि पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने लिखी है। बेदी के कहानी संग्रह सूखे पत्तोंं का राग की साहित्यिक क्षेत्रों में काफी चर्चा हुई है। बेदी के उपन्यास खिला रहेगा इंद्रधनुषष्  पर एक टेली फिल्म भी बन रही है और एस्ट्रोलॉजी साइंस पर उनकी एक शोध पुस्तक शीघ्र आ रही है।

गुरमीत बेदी की व्यंग्य विधा में तीन पुस्तके, इसलिए हम हंसतेे हैं, नाक का सवाल व खबरदार जो व्यंग्य लिखा शीर्षक से प्रकाशित हो चुकी हैं। देश के प्रमुख समाचार पत्रों में उनकेे व्यंग्य के  कॉलम बड़ेे चाव से पढ़े जाते हैं। उन्हें व्यंग्य लेखन के लिए प्रतिष्ठित व्यंग्य यात्रा सम्मान भी मिल चुका है।