सरकार की बड़ी तैयारी, इस कॉरिडोर पर अब तेल से नहीं बिजली से दौड़ेंगे ट्रक

नई दिल्‍ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): सड़क परिवहन और भारी उद्योग मंत्रालय एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं, जिसके बाद ट्रक डीजल नहीं, बिजली से दौड़ते नजर आएंगे। इस संयुक्‍त परियोजना का ट्रायल रन दिल्‍ली से मुंबई के बीच निर्माणाधीन ग्रीन एक्‍सप्रेस हाईवे पर जल्द ही किया जा सकता है। यह ट्रायल रन सफल रहा तो दिल्‍ली से मुंबई के बीच निर्माणाधीन इस हाईवे में बिजली से चलने वाले ट्रकों के लिए एक अलग कॉरिडोर बनाया जाएगा।  

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, दिल्‍ली से मुंबई के बीच निर्माणाधीन ग्रीन एक्‍सप्रेस हाईवे में भारी उद्योग मंत्रालय की मदद से दस किलोमीटर का एक कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें बिजली की तारें लगी होंगी। इन तारों की मदद से 80 टन क्षमता वाले इलेक्ट्रिक ट्रक को पैंटोग्राफ से जोड़ा जाएगा। उन्‍होंने बताया कि इस कॉरीडोर पर चलने वाले ट्रकों में बैटरी का विकल्‍प भी होगा। पैंटोग्राफ की मदद से कुछ किलोमीटर ट्रक चलेंगे। इस समयावधि में ट्रक की बैटरी चार्ज हो जाएगी. जिसके बाद बैटरी पर ट्रकों को चलाया जा सकेगा। बैटरी डिस्‍चार्ज होने पर ये ट्रक वापस बिजली से चलेंगे। 

सिर्फ 12 रुपये में तय कर सकेंगे एक लीटर डीजल जितनी दूरी
उन्‍होंने बताया कि यदि यह योजना सफल रहती है तो एक लीटर डीजल में जितनी दूरी एक ट्रक तय करता है, उसकी दूरी को तय करने में महज 12 रुपए का खर्च आएगा। उन्‍होंने संभावना जाहिर की है कि दिल्‍ली से मुंबई के बीच बनने वाला यह ग्रीन एक्‍सप्रेस हाईवे अगले ढाई से तीन साल में बन कर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद इलेक्ट्रिक ट्रकों का परीक्षण इस कारिडोर में किया जाएगा। उन्‍होंने बताया कि इस हाईवे के बनने के बाद दिल्‍ली से मुंबई की दूरी करीब 120 किमी कम हो जाएगी और महज 12 घंटे में दिल्‍ली से मुंबई का सफर पूरा किया जा सकेगा। 

इन देशों में पहले से सफलतापूर्वक चल रहे इलेक्ट्रिक ट्रक 
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, बिजली से चलने वाले ट्रक हमारे देश के लिए भले ही नई बात हों, लेकिन दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां पर बिजली से ट्रकों को चलाया जा रहा है। जिन देशों में बिजली से ट्रक चलाए जा रहे हैं, उनमें अमेरिका, जर्मनी और स्‍वीडन शामिल हैं। उन्‍होंने बताया कि हाल में उन्‍होंने स्‍वीडन और जर्मनी में बिजली से चलने वाले ट्रकों की परियोजना को देखा है, जिसे जल्‍द ही भारत में लागू किया जाएगा। इस योजना के लागू होने के बाद सामान को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में आने वाली लागत में खासी कमी आएगी।