2022 तक किसान की आय नहीं लागत दोगुनी करने की योजना बना रही सरकार : भूपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़/अम्बाला (राजेन्द्र भारद्वाज) : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 21 दिन से लगातार बढ़ रहे तेल के दामों को किसान और आम आदमी के खिलाफ साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि किसानी का ज़्यादातर काम डीजल पर निर्भर है। सिंचाई से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में सबसे ज़्यादा डीजल इस्तेमाल होता है। लेकिन मौजूदा सरकार डीजल को पेट्रोल से भी महंगा करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। साफ है कि सरकार किसानी को खत्म करना चाहती है। लॉकडाउन में ही लगभग 19 रुपए प्रति लीटर डीजल का दाम बढ़ा है। खेती की लागत और महंगाई दर पर इसका क्या असर हुआ है, इसका पता चलने में समय लगेगा। बीजेपी की जो सरकार 2022 तक किसानों की आय डबल करने का दावा कर रही थी, लगता है कि वो किसान की लागत डबल करने की योजना पर काम कर रही है। डीजल के लगातार बढ़ते दाम के बीच धान का सरकारी रेट सिर्फ 53 पैसे प्रति किलो बढ़ा है, जबकि दो साल से गन्ने के रेट में एक रुपये का भी इजाफा नहीं किया गया। बुआई, कटाई, कढ़ाई और ढुलाई जैसी लागतें बढ़ती जा रही हैं। इस तरह 2022 तक कैसे दोगुनी हो पाएगी किसानों की आय? देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में 6 जून से चल रहा इजाफा लगातार 22वें दिन भी जारी है। कृषि अर्थशास्त्री बताते हैं कि कृषि बहुल प्रदेशों पर 6 से 28 जून तक 22 दिन की बढ़ोत्तरी पर कृषि लागत में कम से कम 2000 रुपये प्रति एकड़ बढऩे का अनुमान है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन के दौरान रोटावेटर से लेवल करने का खर्च प्रति एकड़ 1320 रुपये था। इस साल यानी 2020 में यह बढ़कर 2080 रुपये प्रति एकड़ हो गया है। एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स के जानकार कहते हैं कि डीजल के रेट में वृद्धि से कृषि पर पिछले सालभर के असर की बात करें तो इस साल औसतन 30 फीसदी लागत बढ़ जाएगी। बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ सिंचाई पर ही नहीं, बल्कि खाद के दाम पर भी पडऩे वाला है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2019-20 में 1815 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे 2020-21 में बढ़ाकर 1868 रुपये किया गया है,इसका मतलब ये है कि खरीफ की मुख्य फसल का दाम सरकार ने एक साल में सिर्फ 53 पैसे प्रति किलो की दर से बढ़ाया है।तेल के दामों का सीधा कनेक्शन महंगाई से है। अगर तेल के दाम बढ़ेंगे तो ट्रांसपोर्ट किराया, परिवहन, आवागमन, व्हीकल चलाना और उत्पादन महंगा हो जाएगा।

 इसके चलते हर चीज़ के दाम बढ़ेंगे। सरकार तेल के दाम बढ़ाकर सरकार जनता का तेल निकालने में लगी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हमारे कार्यकाल में तेल सबसे सस्ता था, क्योंकि उसपर टैक्स कम थे। अगर हरियाणा की बात की जाये तो हमारे कार्यकाल में दूसरे राज्यों के लोग भी यहां से तेल डलवाना पसंद करते थे। बॉर्डर के हर पेट्रोल पंप पर लिखा होता था कि ये हरियाणा का पहला या आखिरी पेट्रोल पंप है। ताकि, लोगों को पता चल जाए कि यहां सस्ता तेल मिलेगा। क्योंकि हमारे कार्यकाल में तेल पर वैट 9 प्रतिशत था, जो बीजेपी राज में बढ़कर दोगुना हो गया है। इसलिए हरियाणा में भी पेट्रोल और डीज़ल दोनों के दाम 80 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने वाले हैं। हुड्डा ने तेल की बढ़ी कीमतों और टैक्स की मनमानी दरों का पुरज़ोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को वैट की दरें कम करके फौरन लोगों को राहत देनी चाहिए।  हुड्डा ने मांग की कि प्रदेश और केंद्र दोनों सरकारें अपना टैक्स कम करें, ताकि कच्चे तेल की घटी कीमतों का फायदा आम आदमी को मिल सके।