वार्ता के मेज पर कल फिर आमने-सामने होंगे सरकार और किसान, 26 को लाल किले तक नहीं सिर्फ दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर होगा ट्रैक्टर मार्च

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)-केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत किसानों के प्रतिनिधि शुक्रवार को फिर सरकार के साथ वार्ता के लिए विज्ञान भवन पहुंचेंगे। सरकार के साथ किसान नेताओं की यह नौवें दौर की वार्ता होगी। नए कृषि कानूनों के मसले का समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की पहल के बावजूद केंद्र सरकार आंदोलन की राह पकड़ किसान नेताओं के साथ वार्ता जारी रखेगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सूत्र ने गुरुवार को बताया कि किसान नेताओं के साथ वार्ता पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दिन के 12 बजे किसान प्रतिनिधियों के साथ मंत्रि-स्तरीय वार्ता होगी। उधर, भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने बताया कि शुक्रवार को 12 बजे किसान संगठनों के प्रतिनिधि सरकार के साथ वार्ता के लिए जाएंगे जिसमें वह भी शामिल होंगे।

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नौवें दौर की वार्ता का मुख्य विषय क्या होगा? इस सवाल पर हरिंदर सिंह ने कहा कि किसानों की सिर्फ दो मांगें बची हैं जो प्रमुख हैं और इनमें से पहली मांग तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की है। इस मांग के पूरी होने पर ही किसान नेता दूसरी मांग पर चर्चा करेंगे। 

Farmers Protest: Talks today, Narendra Singh Tomar meets sect head, farm  unions say no link | India News,The Indian Express

किसान यूनियनों के नेता केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं। सरकार के साथ किसान नेताओं के बीच इस मसले को लेकर आठ दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मंगलवार को इन कानूनों के अमल पर रोक लगा दी और शीर्ष अदालत ने मसले के समाधान के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन कर दिया जिसमें चार सदस्यों को नामित किया गया है। हालांकि कमेटी में शामिल एक सदस्य भाकियू नेता भूपिंदर सिंह मान ने खुद को कमेटी से अलग करने की घोषणा की है।

आंदोलनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सामने जाने से मना कर दिया है। नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान के आंदोलन का गुरुवार को 50वां दिन है और देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों का कहना है कि जब तक नये कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। दिल्ली की सीमाओं पर स्थित प्रदर्शन स्थल सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के करीब 40 किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में किसानों का प्रदर्शन चल रहा है।

उधर, भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल समूह) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों को एक खुले पत्र में साफ कर दिया है कि ट्रैक्टर मार्च केवल हरियाणा-नई दिल्ली बॉर्डर पर होगा। उन लोगों का लाल किले पर ट्रैक्‍टर रैली निकालने का कोई इरादा नहीं है। राजेवाल ने उन किसानों को भी अलगाववादी तत्वों से दूर रहने को कहा है जो लाल किले में बाहर ट्रैक्टर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे। ट्रैक्टर परेड के लिए दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर 50-60 हजार ट्रैक्टर पहुंच गए हैं। किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर रैली शांतिपूर्ण तरीके से निकालेंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के कमेटी वाले फैसले पर भी किसान संगठन संतुष्ट नहीं हैं। किसानों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी पर कृषि कानून की प्रतियां जलाई और आंदोलन को और तेज करने की अपील की।