Sunday, November 18, 2018 05:00 AM

खेलों के विकास हेतु

गत दिनों केंद्रीय खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल मंत्रालय एक ऐसी प्रणाली बनाने के लिए प्रयासरत है जिसके तहत स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी, उन्हें संवारा जाएगा और फिर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मंच सुलभ कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना प्रतिभाओं को संवारने की दृष्टि से अत्यंत प्रभावकारी है और इस अवधारणा को लोगों ने बड़े उत्साह के साथ स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक ऐसी परियोजना पर काम कर रही है जिसके तहत देश में 8 से 10 साल की उम्र वाली प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी और उन्हें छात्रवृत्तियां प्रदान की जाएंगी। खेल मंत्री ने कहा कि सरकार एक साधारण परीक्षा (टेस्ट) के आधार पर 8 से 10 साल के बच्चों की शारीरिक फिटनेस के बारे में पता लगाने के लिए स्कूलों के बोर्ड, राज्य सरकारों और सशस्त्र बलों के साथ साझेदारी करेगी। राठौर ने बताया कि प्रथम टेस्ट पूरा हो जाने के बाद 5000 विद्यार्थियों की छंटनी की जाएगी और फिर इसके बाद 1000 विद्यार्थियों की छंटनी की जाएगी जिन्हें फिर सुपर एडवांस टेस्ट से गुजरना होगा। सही खेल के लिए सही शारीरिक फिटनेस प्रतिभा की पहचान की जाएगी और उन्हें 8 वर्षों तक पांच लाख रुपये बतौर छात्रवृत्ति दिए जाएंगे, ताकि जब उस बच्चे की उम्र 16 साल हो जाएगी तो वह उस समय तक एक चैंपियन बनने के लिए तैयार हो जाएगा। उन्होंने विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी एथलीट को आवश्यक धनराशि मांगने के लिए हिचकिचाने की जरूरत नहीं है क्योंकि खिलाडिय़ों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। कर्नल राठौर ने कहा कि एलीट खिलाडिय़ों के लिए राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) के दायरे में रहते हुए टॉप्स (टार्गेट ओलंपिक पोडियम) योजना तैयार की गई है जिसका उद्देश्य ओलंपिक खेलों के लिए संभावित पदक विजेताओं की पहचान करना एवं उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। राठौर ने बताया कि मणिपुर के इम्फाल स्थित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अपनी तरह का पहला ऐसा विश्वविद्यालय होगा जो सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाते हुए चुनिंदा खेल विषयों में खेल शिक्षा को बढ़ावा देगा। कर्नल राठौर ने कहा कि उनका मंत्रालय इस वर्ष के उत्तराद्र्ध में एक विनिर्माता शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर भी विचार कर रहा है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ उनकी भारतीय समकक्ष भी एकजुट होंगी और वे सरकार को यह बताएंगी कि भारत में खेलकूद के उपकरणों का निर्माण शुरू करने के लिए किस तरह के नीतिगत संशोधनों की आवश्यकता है।

केंद्रीय खेल मंत्री स्वयं खेल जगत में अपनी अलग पहचान रखते हैं और खेलों के विकास हेतु सक्रिय भी हैं। सरकार की तरफ से शुरू की गई ‘खेलो इंडिया’ योजना का लक्ष्य भी जिला स्तर पर खिलाडिय़ों की पहचान कर उनको निखारना ही है। खेल मंत्री राठौर के इरादे तो नेक है लेकिन धरातल स्तर पर विशेषतया जिला व राज्य स्तर पर खेल संगठनों पर दशकों से कब्जा जमाए खेल मठाधीशों से जब तक खेल संगठन मुक्त नहीं होते तब तक बात बनने वाली नहीं है। केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय दोनों द्वारा प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए गए थे कि जिला व राज्य स्तर के खेल संगठनों को ओलम्पिक संघ द्वारा दिए निर्देशों अनुसार चलना होगा लेकिन उपरोक्त निर्देशों को आज तक गंभीरता से नहीं लिया गया। ओलम्पिक संघ द्वारा दिए सुझावों अनुसार 70 वर्ष की आयु के व्यक्ति को पद छोडऩा होगा कोई भी व्यक्ति दो ‘टर्म’ से अधिक खेल संगठन का पदाधिकारी नहीं बन सकता।

अतीत में ओलम्पिक संघ दिशा-निर्देशों को लेकर राज्यों के मुख्य सचिवों को ओलम्पिक नियमों को जिला व प्रदेश स्तर पर लागू करने का पत्र भी केंद्र सरकार निकाल चुकी है। लेकिन उसको किसी ने गंभीरता से नहीं लिया और इसी कारण देश में और विशेषतया पंजाब में खिलाडिय़ों और खेलों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। खेल संगठनों के पदाधिकारी मौज में है, प्रतिभावान खिलाडिय़ों की प्रतिभा तभी चमकेगी, जब स्थानीय स्तर पर उसका हित सुरक्षित रहेगा। स्थानीय स्तर की राजनीति के कारण ही खिलाडिय़ों के हित की जगह खेल संगठनों के मठाधीश अपने हित को प्राथमिकता देते हैं। समय की मांग है कि खेल संगठनों को मठाधीशियों से मुक्त कराए तभी ‘खेलो इंडिया’ योजना कामयाब होगी। 


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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