अमिताभ घोष ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले पहले अंग्रेजी लेखक

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): अंग्रेजी लेखक अमिताभ घोष को साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2018 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया है। कोलकाता में वर्ष 1956 में जन्मे लेखक को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा 'लीक से हटकर काम करने वाले रचनाकार' करार दिया गया। पुरस्कार देने वाली संस्था ने कहा कि घोष ने अपने उपन्यासों में इतिहास से आधुनिक युग तक का रास्ता बनाया और एक जगह बनाई जहां अतीत प्रासंगिक तरीकों से वर्तमान से जुड़ता है।

भारतीय ज्ञानपीठ ने एक बयान में कहा, "एक इतिहासकार, एक सामाजिक मानवविज्ञानी के रूप में उनके अकादमिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी कल्पना असाधारण गहराई और सार से संपन्न है। प्रवास व स्थानों पर अंतर संबंध, संस्कृति व जातियों, मानव संकट व ऐतिहासिक अशांति के कारण पीड़ा उनकी प्रमुख विषयगत चिंताओं में शुमार थीं, विशेषकर गिरमिटया, कुली और लस्कर के स्तर पर।"

घोष ने काल्पनिक और तर्कमूलक, दोनों लेखनों में बांग्लादेश, इंग्लैंड, मिस्र और म्यांमार सहित व्यापक अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भारतीय नायकों को तलाशा। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'द सर्किल ऑफ रीजन', 'दे शेडो लाइन', 'द कलकत्ता क्रोमोसोम', 'द ग्लास पैलेस', 'द हंगरी टाइड', 'रिवर ऑफ स्मोक' और 'फ्लड ऑफ फायर' शुमार हैं। यह फैसला प्रसिद्ध उपन्यासकार व विद्वान प्रतिभा राय की अध्यक्षता वाली ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की एक बैठक में लिया गया।

चयन बोर्ड में अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों में गिरीश्वर मिश्र, शमीम हनफी और हरीश त्रिवेदी शामिल थे। पिछले सभी विजेता विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखक थे, लेकिन घोष यह पुरस्कार पाने वाले पहले अंग्रेजी के लेखक हैं।
 

Related Stories: