...जब ससुर ने शीला दीक्षित को कर दिया था बाथरूम में बंद 

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): दिल्ली की तीन बार सीएम रहीं शीला दीक्षित कांग्रेस में ऐसा नाम थी जिस नाम ने दिल्ली में विकास की बयार ला दी थी। शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है। उनके कार्यकाल में दिल्ली में विभिन्न विकास कार्य हुए। शीला दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग में 5 साल (1984-1989) तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह प्रधानमंत्री कार्यालय में 1986 से 1989 तक संसदीय कार्यराज्यमंत्री रहीं। साल 1998 के लोकसभा चुनावों में शीला दीक्षित को भारतीय जनता पार्टी के लाल बिहारी तिवारी ने पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में मात दी, बाद में वह मुख्यमंत्री बनीं। उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो उन्होंने राजनीति के गुर ससुर उमाशंकर दीक्षित से सीखे थे। जीवन में एक वक्त ऐसा आया जब ससुर उमाशंकर ने शीला दीक्षित को बाथरूम में बंद कर दिया था।

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शीला ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू और एक किताब में बताया कि, इंदिराजी की हत्या की सबसे पहले ख़बर उनके ससुर उमा शंकर दीक्षित को मिली थी, जो उस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे, जैसे ही विंसेंट जार्ज के फोन से उन्हें इसका पता चला, उन्होंने मुझे एक बाथरूम में ले जा कर दरवाज़ा बंद किया और कहा कि मैं किसी को इसके बारे में न बताऊं। जब शीला दिल्ली जाने वाले जहाद में बैठीं तो राजीव गाँधी को भी इसके बारे में पता नहीं था। ढाई बजे वो कॉकपिट में गए और बाहर आकर बोले कि इंदिराजी नहीं रहीं।

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