खेती कानून - मोगा के नौजवान ने दिल्ली धरने में मनाया जन्म दिन  

बुजुर्गों को पंजीरी, युवाओं को खोया और डेढ़ क्विंटल खजूर बांटी

मोगा/दविंदर पाल सिंह: मैं किसान परिवार से हूँ। खेतीबाड़ी की बारीकियों और खेतीबाड़ी की चुनौतियों, दोनों को देखते, समझते बड़ा हुआ हूं। खेत में पानी देने के लिए देर रात तक जागना, पोह माघ की रातों में पानी के नके टूट जाने, उसे बंद करने के लिए भागना, बेमौसमी बारिश का डर, समय पर बारिश की खुशी यह सब मेरे भी जीवन का हिस्सा रहे हैं। फसल काटने के बाद उसे बेचने के लिए हफ्तों का इंतजार भी मैंने देखा है। यह विचार उस उद्यमी नौजवान सुखबीर सिंह सिद्धू गांव धल्लेके (मोगा) के हैं जिसने दिल्ली धरने में अपने पारिवारिक सदस्यों और किसानों के साथ जन्म दिन मना कर काले कानूनों खिलाफ किसानों के साथ संघर्ष में डटे रहने की मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि पूंजी पतियों ने पब्लिक सेक्टर के कई अदारों को निगल लिया है और पब्लिक साधनों की लूटमार की है। यह किसानी को खा जाएंगी। देश, किसानों और आम खपतकारों के हक में है कि यह तीन खेती कानून, बिजली संशोधन बिल और पराली कानून तुरंत वापस लिए जाए ताकि किसान बढ़ रही सर्दी में सडकों पर बैठने के लिए मजबूर न हों। इस नौजवान की मां कुलबीर कौर ने कहा कि उसका पति सुरैण सिंह सिद्धू विदेश गया हुआ है। नौजवान के मामा एवं मोगा में लाली कंप्यूटर से मशहूर कारोबारी जगदीप सिंह लाली ने कहा कि वह अब कानून रद्द होने तक वापस नहीं लौटेंगे। केंद्र के खेती कानून गैर संवैधानिक और गैर कानूनी हैं। वह अपनी विवाह की वर्ष की गांठ, बच्चों का जन्म दिन भी यहां ही मनाएंगे। उन्होंने कहा कि भांजे के जन्म दिन की खुशी में उन्होंने बुजुर्गों के लिए जडी बूटियों वाली पंजीरी, नौजवानों के लिए शुद्ध खोया की पिनीया और डेढ़ क्विंटल खजूर बांटी हैं। 

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार लगातार किसानों को बातचीत के लिए बुला रही है, दूसरी तरफ मोदी सरकार ने देश भर में अपने पार्टी वर्करों के साथ खेतीबाड़ी कानूनों के समर्थन में एक मुहिम चला रही है। पंजाब से रोजाना किसानों के जत्थे जा रहे हैं। किसान जत्थेबंदियों के आंदोलन की सब से बड़ी सफलता यह है कि देश में एकाअधिकार पूंजीवाद बारे बहस शुरू हो गई है। देश के कई बड़े कॉर्पोरेट घराने एकाधिकार सरमाएदारी का शिकार हो सकते हैं। कई कॉर्पोरेट घराने किसान आंदोलन से अंदरूनी खुश हैं क्योंकि किसानों ने अडानी और अम्बानी के एकाअधिकार कब्जे को निशाना बनाया है। खेती कानून लागू होने से पूंजी निवेस बढऩे की बजाय खेती और किसानी का उजाडा होगा।