प्रधानमंत्री के लिए किसान भगवान लेकिन कांग्रेस के लिए किसान है मात्र वोट बैंक : कृष्णपाल गुर्जर

केंद्रीय राज्य मंत्री के कार्यालय पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ी स्क्रीन पर देखा गया लाइव कार्यक्रम
फरीदाबाद/मनोज तोमर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिवस पर सुशासन दिवस के तहत शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि के तहत 18000 करोड की राशि किसानों के खातों में डाली । फरीदाबाद में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के सेक्टर-28 स्थित कार्यालय पर बड़ी स्क्रीन पर इस लाइव टेलीकास्ट को देखा गया, जिसमें भारी संख्या में बीजेपी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता के अलावा किसान भी शामिल हुए । केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि किसान प्रधानमंत्री मोदी के लिए भगवान हैं जबकि विपक्ष के लिए वह मात्र वोट बैंक है । कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि आज भारत रतन अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्मदिवस है जिसे सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है । आज देश के प्रधानमंत्री ने 18000 करोड की राशि किसानों के सम्मान निधि खातों में डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों के प्रति समर्पित सरकार है उनके लिए किसान हित ही सर्वोपरि है 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने के लिए सरकार नए-नए बिल ला रही है जिसके चलते किसानों को आजादी देने के लिए हाल ही में तीन कृषि बिल पास किए गए । जिस स्वामीनाथन रिपोर्ट को कांग्रेस ने दबा कर रखा था मोदी सरकार ने उस रिपोर्ट को लागू करने का काम किया है । प्रधानमंत्री की इच्छा है कि देश का किसान आप पर निर्भर और संपन्न बने इसलिए यह बिल ऐतिहासिक काम करने वाले हैं, जबकि विपक्ष किसानों को भ्रमित करने का काम कर रहा है और प्रधानमंत्री मोदी उन्हें समझाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी सरकार किसान को भगवान समझती है जबकि विपक्ष किसानों को मात्र वोट बैंक समझ रहा है । उन्होंने कहा कि तीन कृषि बिलों के रिजल्ट जब सामने आएंगे अब किसानों को इन बिलों की असलियत मालूम होगी । उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए मोदी के दरवाजे किसानों के लिए हमेशा खुले हुए हैं जिसके चलते यह दौर की वार्ता हो चुकी है । उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि शुरू में किसान संगठन एमएसपी लिखित में चाहते थे जिसे प्रधानमंत्री ने  मान लिया था लेकिन अब वह फिर मुकर रहे हैं । उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन में उमर खालिद और भिंडरावाले के पोस्टर लहराए जाते हो उसे हम किसान आंदोलन नहीं कह सकते ।