Friday, May 24, 2019 12:46 AM

चुनावी जंग

राजनीतिक पार्टी का पहला लक्ष्य सत्ता हासिल करना ही होता है। लोकतंत्र में मतदाता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिये कई प्रकार की लोक लुभावन घोषणायें राजनीतिक दल करते हैं, जिनको पूरा करना संभव नहीं होता। भारतीय लोकतंत्र की पहली सब से बड़ी कमजोरी बाहुबल और धनबल की बढ़ती भूमिका को ही माना जाता था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही सत्ता प्राप्ति के लिये देश की अखण्डता को भी दाव पर लगाने की बातें सामने आ रही हैं। ऐसी आवाजों का मुख्य केंद्र जम्मू-कश्मीर का घाटी क्षेत्र ही है। जम्मू और लेह-लद्दाख क्षेत्र में जहां राष्ट्रहित तथा राष्ट्र प्रेम से जुड़ी आवाजें सुनाई दे रही हैं वहीं घाटी में देश की अखण्डता को चुनौती देने वाली आवाजें उठ रही हैं।

भाजपा को तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मात देने के लिए जहां देश में गैर सिद्धांतिक गठबंधन हो रहे हैं वहीं क्षेत्र, साम्प्रदायों तथा जाति को आधार बनाकर राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि का प्रयास हो रहा है। कश्मीर घाटी में पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस तथा अलगाववादियों को समर्थन देने वाले अन्य क्षेत्रीय संगठन जो कह और कर रहे हैं उसकी प्रतिक्रिया देश के अन्य भागों में मिल रही है। घाटी के बागी सुरों के विरोध में भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को प्राथमिकता दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो भारतीय सेना को मोदी सेना तक कह दिया जो कि अनुचित है। सेना देश की है किसी राजनीतिक दल की नहीं है। उपरोक्त माहौल में कांग्रेस ने जो घाषणा पत्र जारी किया है उससे कई प्रकार के भ्रम व भ्रांतियां तो फैली ही हैं साथ में घाटी में अलगाववादियों को भी शह मिलती दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसान और गरीबों की बात भी की है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र को 'जन आवाज' नाम दिया है। 'हम निभाएंगे' के वादे के साथ 54 पेज के घोषणापत्र में कांग्रेस ने राफेल समेत मोदी सरकार के दौरान हुए सभी सौदों की जांच कराने का वादा भी किया है। अपनी न्याय योजना का पहले ही ऐलान कर चुकी कांग्रेस ने इसे प्राथमिकता के साथ घोषणापत्र में शामिल किया है। राहुल ने कहा कि देश के सबसे गरीब 20त्न लोगों के खाते में हर साल 72 हजार रुपये डाले जाएंगे। राहुल ने यह भी कहा कि इससे मोदी के नोटबंदी करने के फैसले से जाम हुई अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। मनरेगा और किसानों की कर्जमाफी की तरह इस योजना के लिए भी पैसे का इंतजाम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के खत्म किए योजना आयोग को दोबारा शुरू किया जाएगा। मुस्लिम महिलाओं से संबंधित 3 तलाक मुद्दे पर कांग्रेस ने चुप्पी साध ली है। जबकि, हिंदू आतंकवाद को लेकर पूछे सवाल पर राहुल ने यही कहा कि सभी हिंदू हैं। कांग्रेस ने कहा है कि सत्ता में आने पर देशद्रोह से संबंधित भारतीय दंड सहिता की धारा 124ए खत्म की जाएगी। पूर्वोत्तर के राज्यों में सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार देने वाले सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (आफस्फा) की समीक्षा की जाएगी। जम्मू-कश्मीर से संबंधित धारा 370 को बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुड्डुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। दिल्ली में उपराज्यपाल 3 आरक्षित विषयों को छोड़कर अन्य सभी में मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करेंगे।
 
इसके अलावा कांग्रेस के वायदे इस प्रकार हैं
*सरकारी क्षेत्र में 22 लाख नौकरियां देंगे। सरकारी क्षेत्र में खाली पड़े इन पदों को मार्च 2020 तक भरा जाएगा। *ग्राम पंचायतों में 10 लाख लोगों को रोजगार देंगे * कारोबार करने के लिए 3 साल तक सरकार से कोई अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी *मनरेगा में काम के दिन 100 से बढ़ाकर 150 करेंगे *किसानों के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा *बैंकों का कर्ज न चुका पाने पर किसानों के खिलाफ आपराधिक के बजाय सिर्फ दीवानी मामला चलेगा *जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च होगा *गरीबों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा *महिलाओं को विधायिका के साथ सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण।

कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व जिहादियों और माओवादियों के चंगुल में है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के घोषणापत्र में किए बड़े-बड़े वादे नासमझी में किए गये हैं। नासमझी के वादे करने वाली पार्टी एक भी वोट की हकदार नहीं है। जिस प्रावधान को नेहरू, इंदिरा, राजीव, मनमोहन सिंह ने छूने का प्रयास नहीं किया, उसी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने जो खतरनाक वादे किए हैं, देश की जनता उन्हें यह अवसर नहीं देगी।' कांग्रेस की न्याय योजना पर जेटली ने कहा कि यह नहीं बताया जा रहा है कि पैसा कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में राजीव और इंदिरा ने गैर-जिम्मेदाराना काम किया था। देश की आमदनी तो बढ़ाई नहीं, लेकिन खर्चा बढ़ा दिया। बाद में हालात खराब होने पर देश को बचाने के लिए मनमोहन सिंह को ढूंढकर लाना पड़ा। धारा 370 को कायम रखने संबंधी कांग्रेस के वादे पर सवाल उठाते हुए जेटली ने कहा कि घोषणापत्र में कश्मीरी विस्थापितों की मुश्किलों पर एक शब्द नहीं कहा गया है। उन्होंने कहा, 'लगता है कि घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की ड्राफ्टिंग कांग्रेस अध्यक्ष के टुकड़े-टुकड़े गैंग के दोस्तों ने तैयार की है। कश्मीर को लेकर नेहरू गांधी परिवार के विफल एजेंडे को अब भी कांग्रेस आगे बढ़ा रही है।

ममता, माया और मुलायम सहित क्षेत्रीय दलों के भाजपा विरोधी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ऐसे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे चुनावी जंग का स्तर भी गिरता दिखाई दे रहा है। जिस की प्रतिक्रिया में अन्य दलों के  नेता भी मर्यादा तोड़ते दिखाई दे रहे हैं यह चिंता का विषय है। देशहित से बड़ा किसी दल या नेता का हित नहीं हो सकता। चुनावी जंग को जीतने के लिये जिस तरह देशहित को दाव पर लगाया जा रहा है यह अति चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद भूलकर तथा राजनीति से ऊपर उठकर राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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