Wednesday, November 21, 2018 01:58 AM

आर्थिक अपराधी

बैंकों से हजारों-करोड़ों रुपए की हेराफेरी कर देश छोडक़र भाग जाने वाले आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए मोदी सरकार संसद में आर्थिक अपराधी विधेयक पारित कराने में सफल रही है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में इस पर करीब सवा तीन घंटे चली चर्चा का जवाब देेते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य भगोड़े आर्थिक अपराधियों को स्वदेश लाना और भविष्य में इस तरह की अपराध कर देश छोड़ कर भागने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि इसमें 100 करोड़ रुपए का स्तर इसलिए बनाया गया है ताकि इसके तहत बनने वाली विशेष अदालत में त्वरित और निर्धारित समयावधि में कार्रवाई हो सके। एक बार भगोड़ा आर्थिक अपराधी विशेष अदालत में पेश हो जायेगा तो फिर उसके विरुद्ध अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि विजय माल्या, चौकसी और नीरव मोदी जैसे कई और ऐसे बड़े कारोबारी घरानों के लोग बैंकों से ठगी मारकर विदेशों में बैठे हैं , अब उन्हें वापस देश लाने और स्वदेश में उनकी सम्पत्ति को जब्त करना आसान हो जाएगा। देश के लोगों से ठगी कर विदेशी बैंकों में अपना कालाधन रखने वालों पर भी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने राज्य सभा में कहा है कि 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने के बाद से 2017 के अंत तक स्विस बैंकों में जमा राशि में 80 फीसदी की कमी आई है। केंद्रीय बैंकों की अंतरराष्ट्रीय संस्था बैंक फॉर इंटरनैशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने इन खबरों से इनकार किया कि स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा कराई जाने वाली राशि में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने स्विस नैशनल बैंक के हवाले से यह दावा किया गया था। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी कहा कि स्विस नैशनल बैंक के आंकड़ों की अक्सर गलत व्याख्या की जाती है क्योंकि इसमें गैर जमा देनदारी, स्विस बैंकों की भारत में स्थित शाखाओं के कारोबार और अंतरबैंक लेनदेन और बाकी देनदारियों को भी शामिल किया जाता है। गोयल ने कहा कि सरकार ने स्विस बैंकों से 4,000 तरह की सूचनाएं मांगी थीं और इसके आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी। 2017 में गैर बैंक जमा राशि 52.4 करोड़ डॉलर रह गई जो 2016 में 80 करोड़ डॉलर और 2014 में 223.4 करोड़ डॉलर थी।

आर्थिक अपराधियों, कालेधन और भ्रष्टाचार इत्यादि पर नकेल कसने के लिए पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने समय की मांग अनुसार कई कदम उठाए हैं और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अगर सरकार और समाज यह न समझे कि मात्र कानून बनाने से ही उपरोक्त समस्याएं समाप्त होने वाली है। कालेधन और भ्रष्टाचार पर तो तभी नकेल पड़ेगी जब आम आदमी इन दोनों के विरुद्ध अपना मन बना लेगा। जब जन साधारण कर देने में देश सेवा समझ लेंगे तभी कालाधन, भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधियों की संख्या कम होगी। दूसरा पहलू यह है कि इंसान कर चोरी तभी करता है जब उसको आर्थिक अनिश्चितता दिखाई देती है और वह भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। सरकार को वर्षों कर देने के बाद भी उसका तथा उसके परिवार का भविष्य असुरक्षित ही रहता है।

सरकार को जन साधारण के मन में बैठी भविष्य में असुरक्षा की भावना को समाप्त करने के लिए करदाता व उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना चाहिए। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य व बच्चों की शिक्षा का प्रबंध भी यकीनी बनाना चाहिए। इंसान को जब उपरोक्त तीनों आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर सुरक्षा मिल जाती है तो फिर उसकी आर्थिक अपराधी बनने की संभावना कम हो जाती है।
सरकार व समाज दोनों को देश से कालाधन, भ्रष्टाचार व आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए उपरोक्त सभी पहलुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार कर स्थाई हल ढूंढना चाहिए।



-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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