तलाक हो जाने के बाद दहेज उत्पीड़न का केस नहीं कर सकती महिला: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)- सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पति-पत्नी के बीच तालाक हो जाने के बाद किसी भी शख्स या उसके परिजनों के खिलाफ महिला दहेज का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। 

अदालत ने यह बात एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट की जब एक शख्स और उसके परिजन पीठ के समक्ष पहुंचे थे कि धारा 498ए और दहेज निषेध अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया जाए। अदालत में पूर्व पति और उसके रिश्तेदारों के वकील ने पीठ के समक्ष पहुंचे थे कि दंपति के बीच तलाक को चार साल हो चुके हैं ऐसे में मामला तर्कसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि इस बहस में ज्यादा वास्तविकता है। पीठ ने कहा, ' उनके (महिला) अपने कथन के मुताबिक उनका चार साल पहले तलाक हो चुका है।

पीठ ने कहा कि जब किसी मामले में तलाक हो चुका हो, तो वहां धारा 489ए नहीं लागू हो सकता है। इसी तरह से दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3/4 के तहत भी मामला दर्ज नहीं हो सकता। दहेज के प्रावधानों के तहत जुर्माने के साथ अधिक से अधिक 5 साल जेल का प्रावधान है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498A या दहेज निषेध अधिनियम के किसी भी प्रावधान के तहत, दंपति के अलग होने के बाद अभियोजन टिकाऊ नहीं रहेगा।