धनखड़ बरोदा उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी होंगे ? 

अम्बाला,चंडीगढ़ (राजेन्द्र भारद्वाज,मोहन अरविंद): आज हरियाली तीज के दिन प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और पिछली हरियाणा सरकार में कृषि मंत्री रह चुके ओम प्रकाश धनखड़ रोहतक स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं। लिखने योग्य है कि धनखड़ हरियाणा भाजपा के आज तक के ग्यारवें प्रदेशाध्यक्ष होंगे। वह सुभाष बराला का स्थान लेंगे जो साढ़े पांच वर्ष पूर्व नवम्बर, 2014 में इस पद पर नियुक्त किये गए थे। उनसे पूर्व वर्ष 1980 से 2014 तक कमला वर्मा , रामविलास शर्मा, सूरज भान, डॉ. मंगल सेन, रमेश जोशी, ओपी ग्रोवर, रतनलाल कटारिया, गणेशी लाल, आत्म प्रकाश मनचंदा और कृष्णपाल गुज्जर भी इस पद पर आसीन रह चुके हैं। बहरहाल इसी बीच अम्बाला शहर निवासी एवं हाई कोर्ट एडवोकेट हेमंत कुमार ने आज सुबह नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ को उनके पदग्रहण करने पर शुभकामनायें देते हुए साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय हाई कमान अर्थात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, हरियाणा के भाजपा प्रभारी डॉ अनिल जैन आदि को ट्वीट कर धनखड़ को ही सोनीपत जि़ले की बरोदा सीट पर शीघ्र होने वाले उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी बनाने बारे सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि आज से नौ माह पूर्व अक्टूबर 2019 में हुए हरियाणा विधानसभा आम चुनावो में धनखड़ ने झज्जर जि़ले की बादली सीट से चुनाव लड़ा परन्तु तब वह कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप वत्स से 11245 वोटो के अंतर से हार गए थे। इस चुनाव में वत्स को 45441 (37.54 प्रतिशत) जबकि धनखड़ को 34196 (28.25 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए थे। रोचक बात है की इसमें

जननायक जनता पार्टी के उम्मीदवार संजय कबलाना को 28145 अर्थात 23.25 वोट मिले जबकि इनेलो के महाबीर गुलिया को मात्र 389 अर्थात 0.32 प्रतिशत ही वोट प्राप्त हुए। ज्ञात रहे भाजपा और जजपा दोनों दलों ने बीते वर्ष विधानसभा चुनावो पश्चात गठबंधन किया। लिखने योग्य है कि हालांकि अक्टूबर,2014 के विधानसभा आम चुनावो में धनखड़ ने कांग्रेस के वत्स को 9266 वोटो से पराजित किया था। यह राजनैतिक जीवन में उनकी पहली जीत थी। इससे पहले अप्रैल, 2014 में धनखड़ ने 16 वी लोक सभा के आम चुनावो में रोहतक सीट से चुनाव लड़ा था परन्तु वह कांग्रेस के दीपेंदर हुड्डा से 1 लाख 70 हज़ार 627 वोटो से हार गए थे। यह उनके द्वारा लड़ा पहला लोक सभा चुनाव था।
हेमंत ने बताया कि अक्टूबर 2019 हरियाणा विधानसभा चुनावो में बरोदा विधानसभा सीट से कांग्रेस के दिवंगत श्री कृष्ण हुड्डा ने ओलिंपियन एवं कुश्ती चैंपियन भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे योगेश्वर दत्त को 4840 वोट से हराया था। इन चुनावो में हुड्डा को 42566 (34.67 प्रतिशत) वोट जबकि योगेश्वर को 37726 (30 .73 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए। रोचक बात यह है कि जजपा के उम्मीदवार भूपिंदर मालिक ने भी इन चुनावो में अच्छा प्रदर्शन किया एवं वो 32480 (26 .45 प्रतिशत) वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं इनेलो प्रत्याशी जोगिन्दर को इस सीट से मात्र 3145 वोट (2.56प्रतिशत ) जिस कारण उनकी ज़मानत जब्त हो गयी थी।

बड़ोदा सीट पर आज तक हुए विधानसभा चुनावो के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर हेमंत ने बताया कि फरवरी 1967 में हरियाणा विधानसभा के पहले आम चुनावो में इस हलके को अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया एवं अक्टूबर,2009 के विधानसभा चुनावो में इसे अनारक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले 1967 विधानसभा आम चुनावो में कांग्रेस के राम धारी यहाँ से विजयी हुए जबकि इसके अगले वर्ष 1968 में हुए मध्यावधि चुनावो में विशाल हरियाणा पार्टी से श्याम चंद जीते। 1972 चुनावो में कांग्रेस पार्टी से फिर श्याम चंद जीते। देश में इमरजेंसी हटने के बाद वर्ष 1977 चुनावो में देवी लाल के नेतृत्व में इस सीट से जनता पार्टी के भाले राम , 1982 में लोकदल से फिर भाले राम, 1987 में लोकदल से रिटायर्ड आईएएस अधिकारी किरपा राम पूनिया, फिर 1991 में जनता पार्टी से रमेश कुमार खटक, 1996 में समता पार्टी से दुबारा रमेश कुमार, 2000 चुनावो में इनेलो से एक बार फिर रमेश कुमार जबकि 2005 चुनावो में इनलो से रामफल चिराना विजयी हुए। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया जिसके बाद अक्टूबर 2009 से लेकर अक्टूबर 2019 तक लगातार तीन बार श्री कृष्ण हुड्डा कांग्रेस पार्टी की टिकट पर बड़ौदा से विधायक बने। 2009 चुनावो में हुड्डा ने इनेलो के कपूर सिंह नरवाल को 25 हज़ार के अंतर से हराया लेकिन 2014 में दोनों के बीच हुए मुक़ाबले में हुड्डा की जीत का अंतर घटकर 5183 रह गया था जबकि 2019 में हुड्डा 4880 वोटों से जीते।

हेमंत का मानना है कि चूँकि बरोदा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा-जजपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो यह देखने लायक होगा कि क्या यहॉ से जाट या गैर-जाट उम्मीदवार उतारा जाएगा ? हालांकि अगर नव-नियुक्त भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़, जो जाट समुदाय से हैं, को पार्टी इस उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बनाती है तो निश्चित तौर पर यहाँ जीतना उनके लिए चुनौती और अवसर दोनों होगा। उनकी उम्मीदवारी पर भाजपा का पार्टी कैडर भी पूरे जोश से एकजुट होकर अपने नए प्रदेश प्रधान की जीत सुनिश्चित करने के लिए जुट जाएगा। आज तक बरोदा में हुए कुल 13 चुनावो में देवी लाल-चौटाला की पार्टी सात बार, कांग्रेस पांच बार जबकि विशाल हरियाणा पार्टी एक बार विजयी रही है।