जल संकट के मुद्दे पर राज्यसभा में विशेष चर्चा कराने की मांग

नयी दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): देश में निरंतर बढ रहे जल संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सदस्यों ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा कराने और समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आज मांग की। भारतीय जनता पार्टी के सत्यनारायण जटिया, अशोक वाजपेयी और सरोज पांडे तथा समाजवादी पार्टी के रेवती रमण सिंह ने शून्यकाल में जल संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और नदियों को जोड़ने जैसी परियोजनाओं पर अमल किया जाना चाहिए। 

सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने सदस्यों से इस बारे में नोटिस देने को कहा जिससे कि सदन में इस पर सार्थक बहस करायी जा सके। सभापति ने कहा कि पानी को संरक्षित करने के साथ साथ इस मुद्दे को प्राथमिकता दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को सुझावों और समाधान के साथ इस बारे में अपनी बात रखनी चाहिए। सदन में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने भी इस मुद्दे पर सदन में विशेष चर्चा कराने का सुझाव दिया। कई अन्य सदस्यों ने भी जल संकट के मुद्दे पर चर्चा का समर्थन किया। 

जटिया ने कहा कि कई राज्यों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। इससे निपटने के लिए पांच बड़ी परियोजनाओं पर काम किये जाने के साथ नदियों को जोड़ने की परियोजना पर बल दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल संबंधी विषयों के लिए अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाया है और उसे गंभीरता के साथ जरूरी मुद्दों की दिशा में कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बार उपयोग किये गये पानी का उपयोग सिंचाई के काम में किया जाना चाहिए। पांडे ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन के लिए विशेष कदम उठाने की बात कही। अशोक वाजपेयी ने नीति आयोग की हाल ही में हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि राजधानी दिल्ली में ही पानी का संकट है।