कांग्रेस का संकट

लोकसभा चुनावों में लगे झटके के कारण कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अपने पद से त्यागपत्र देने की पेशकश करने के साथ-साथ कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को एक महीने में गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को अध्यक्ष पद के लिए चुनने को कहा था। राहुल गांधी द्वारा लिए उपरोक्त निर्णय के कारण कांग्रेस नेतृत्व पर संकट के बादल छा गये हैं।

अब पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक महीने तक अपने प्रवक्ताओं को टीवी बहसों में नहीं भेजने का फैसला लिया है। सभी मीडिया चैनलों और संपादकों से अनुरोध है कि वे अपने कार्यक्रमों में कांगे्रेस प्रतिनिधियों को नहीं बुलाएं। लोकसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन और कांग्रेस को महज 52 सीटें मिलने के बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अध्यक्ष पद से त्यागपत्र पर अडऩे के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस को मिली हार को लेकर राहुल गांधी ने जो रुख अपनाया है उसको देखते हुए दिल्ली, पंजाब, राजस्थान सहित कई प्रदेश इकाइयों ने राहुल गांधी को अपना फैसला बदलने के लिए आग्रह भी किया है और प्रस्ताव पारित कर अपना विश्वास भी राहुल गांधी के प्रति जताया है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रस्ताव दिया है कि राहुल गांधी पार्टी की बागडोर कार्यकारी अध्यक्ष को सौंपकर देश की पदयात्रा पर निकलें साथ ही सुझाव दिया कि कोई बड़ी घटना हो तो वहां जाकर संघर्ष और नेतृत्व करें।


राहुल गांधी के तेवरों को शांत करने के लिए कई प्रदेशों के कांग्रेस अध्यक्ष त्यागपत्र दे चुके हैं। कटु सत्य यही है कि कांग्रेस की हार का एक मुख्य कारण राहुल गांधी का नेतृत्व ही है। राहुल गांधी देश के जन की भावनाओं को समझने में असफल रहे हैं और उनके आस-पड़ोस के लोगों ने राहुल गांधी को इस बात का एहसास भी नहीं होने दिया। खुशामद करने वाले अपने स्वार्थ की पूर्ति करते रहे और राहुल गांधी पर उन्होंने दबाव भी बनाये रखा।

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की हार का दूसरा बड़ा कारण राहुल गांधी को लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में अस्वीकार करना भी है। नरेन्द्र मोदी जिस तरह राष्ट्र के प्रति अपनी भावनाएं अपने शब्द द्वारों अपने शारीरिक हाव-भाव से लोगों के सामने रखते हैं उस मुकाबले राहुल गांधी कहीं भी टिकते नहीं। जन साधारण को नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में कोई नेता न दे पाना भी कांग्रेस का चुनावों में हार का मुख्य कारण है। आज भी कांग्रेस इस स्थिति में नहीं है कि वह नरेन्द्र मोदी का विकल्प दे सके। कांग्रेस के पास आज के समय तो राहुल गांधी का विकल्प भी दिखाई नहीं देता। इसलिए राहुल द्वारा अपनाये रुख के कारण कांग्रेस के भीतर हाहाकार मची हुई है। आगामी पांच वर्षों में कांग्रेस नेतृत्व के लिए कांग्रेस के आधार को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में जनता के सामने नेता और नीति दोनों रखनी होगी। ऐसा न होने पर कांग्रेस का राजनीतिक संकट बढ़ता चला जाएगा।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।