आपराधिक सम्पत्ति

प्रवर्तन निदेशालय ने विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली बार प्रत्यक्ष आरोप पत्र दायर किया है। नाईक पर 193 करोड़ रुपए के आपराधिक धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) व भारत समेत अन्य देशों में अवैध सम्पत्ति बनाने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी ने उसकी 50 करोड़ की सम्पत्ति भी जब्त कर ली है। ईडी ने मुंबई के पीएमएलए कोर्ट में नाईक के खिलाफ अभियोजन की शिकायत दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि उसके भड़काऊ भाषणों ने मुस्लिम युवाओं को भारत में गैरकानूनी और आतंकी कार्रवाई के लिए उकसाया। साथ ही उसके विचारों ने दूसरे धर्म में आस्था वाले लोगों में घृणा फैलाने का काम किया। वैसे तो ईडी ने नाईक के खिलाफ यह दूसरी चार्जशीट पेश की है पर नाईक की भूमिका का उल्लेख करते हुए यह पहली चार्जशीट है। ईडी ने नाईक पर दिसंबर 2016 में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। फिर नाईक ने भारत छोड़कर मलेशिया में शरण ले ली थी। पूर्व में ईडी नाईक के म्यूचुअल फंड, चेन्नई स्थित इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल, मुंबई और पुणे में 10 फ्लैट, 10 बैंक खाते, तीन गोदाम और दो इमारतें सील कर चुकी है। ईडी के मुताबिक एजेंसी नाईक के दुबई स्थित आलीशान बंगले को भी जब्त करने की तैयारी में है। ईडी का कहना है कि नाईक ने विदेश से भारत में पैसे ट्रांसफर किए और पुणे-मुंबई में रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां बनाईं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को वैश्विक आतंकवादी हाफिज सईद से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के मामले में 73.12 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है। ईडी अधिकारियों के मुताबिक धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अंतरिम आदेश जारी कर दिया है। ईडी ने लश्कर-ए-ताइबा के संस्थापक हाफिज सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग मामले में जांच के दौरान यह संपत्ति मोहम्मद सलमान और उसके पारिवारिक सदस्यों से जब्त की है। इस संपत्ति में एक फ्लैट, एक दुकान और बैंक खाता शामिल हैं। एजेंसी ने पिछले कुछ महीनों में सईद के खिलाफ आतंकी फंडिंग से जुड़े दर्जन भर मामलों में 212 करोड़ की प्राप्ति चिह्नित की है।

पिछले समय में कश्मीर घाटी में अलगाववादियों की सम्पत्ति भी जब्त की गई थी। देश के विरुद्ध कर्म करने और आवाज उठाने वालों को विदेशों से कितना धन मिलता है यह तो जांच एजेंसी द्वारा उपरोक्त दिए विवरण से पता चल जाता है लेकिन वर्षों से विदेशों से आ रहे धन के प्रति दिखाई गई उदासीनता का भी तो उपरोक्त सम्पत्ति एक प्रमाण भी है। मोदी सरकार ने पिछले समय सैकड़ों नहीं हजारों गैर सरकारी संस्थाओं पर शिकंजा कसा था जिन्हें विदेशों से लाखों-करोड़ों रुपए सहायता के रूप में मिलते थे। यह संस्थाएं अपना हिसाब-किताब देने को भी तैयार नहीं थी। सरकार की सख्ती के बाद कईयों पर पाबंदी लगा दी गई है और कई अभी छानबीन के घेरे में हैं। देश में धर्मपरिवर्तन और साम्प्रदायिक दंगों के लिए भी विदेशी धन इस्तेमाल होता है। इसलिए सरकार को देश विरोधी तत्वों द्वारा धन के लेन-देन प्रति और सतर्क होने की आवश्यकता है।

आतंकियों, अलगाववादियों और देश विरोधियों को विदेशी धन मिलता है यह बात तो उपरोक्त तथ्यों से साबित हो ही गई है। अब समय है कि हम विदेशों में बैठे भारत विरोधियों के नापाक इरादों को समझते हुए भारत में बैठे उनकी मदद करने वालों पर शिकंजा कसते चले जाएं और देश के गद्दारों को जन के सामने लाकर उन्हें उनके किए की सजा दें।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।