कोरोना वैक्सीन

पिछले दिनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से कोरोना से बदतर हो रहे हालात पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वैक्सीन आने तक कोरोना विरुद्ध पूरी मुस्तैदी से लड़ाई के हर प्रयास पर •ाोर देते हुए इसमें टेस्ट बढ़ाने, संक्रमण की दर पांच फीसद से नीचे रखने, मृत्युदर एक फीसद से कम करने और वैक्सीन को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की तैयारी शामिल है। वैक्सीन को लेकर रोजाना हो रहे दावों के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अभी निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता है कि वैक्सीन कब आएगी। वैज्ञानिक उसकी गुणवत्ता, क्षमता और सुरक्षा को परख लेेंगे तभी उसे अनुमति दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में हमें जरा भी ढिलाई नहीं करनी है, लेकिन देखने में आया है कि कई स्थानों पर लोग सतर्कता का पालन नहीं कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अंतिम चरण में है और वैक्सीन के मोर्चे पर कई सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। परंतु वैक्सीन कब तक आएगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। यह वैज्ञानिक ही तय करेंगे। तब तक राज्यों को वैक्सीन डिलीवरी के लिए कोल्डचेन तैयार करने और जिला एवं ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स गठित करने के साथ-साथ कोरोना के खिलाफ मौजूदा लड़ाई पहले की तरह जारी रखनी होगी। भारत आपदा के गहरे संकट से बाहर निकलकर किनारे की तरफ बढ़ रहा है। किसी आलस्य से कहीं ऐसा न हो जाए कि हमारी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था। हमें ऐसी स्थिति नहीं आने देनी है। छ्व दूसरे देशों की तरह कुछ राज्यों में तेजी से बढ़ रहे मामले। छ्व उबरने की दर व मृत्युदर के मामले में भारत कई देशों से बेहतर। छ्व इससे लोगों को लगने लगा है कि वायरस खतरनाक नहीं है और कमजोर पड़ गया है। छ्व लोग लापरवाह हो गए हैं और गलतियां खतरे में बदल रही हैं। छ्व हमें कोरोना महामारी के खतरे के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। छ्व संक्रमण को रोकने के लिए सरकारों और प्रशासन को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

गौरतलब है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना महामारी के कारण बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए कहा था कि हालात पर काबू पाने के लिए केंद्र तथा सभी राज्यों की सरकारों की तरफ से तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से भीड़ पर काबू करने की हिदायत दी है। विभिन्न कार्यक्रमों में उमड़ती भीड़ और इस दौरान सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी से चिंतित गृह मंत्रालय ने राज्यों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, केवल उनके लिए जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। गृह मंत्रालय ने राज्यों को विभिन्न समाराहों में भाग लेने वालों की संख्या 200 से कम करने की छूट दे दी है। हालांकि बिना केंद्र की सहमति के वे कंटेनमेंट जोन के बाहर लोकल लॉकडाउन नहीं लगाएगा। दिशा निर्देश एक से 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेंगे। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सर्दी और त्योहारों के कारण कोरोना के संक्रमण में आए उभार को केवल सर्विलांस, कंटेनमेंट और सावधानी के बल पर ही रोका जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन जरूरी है। गृह मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से तय किए गए प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में स्थानीय जिला, पुलिस और नगर निकाय प्रशासन को जिम्मेदार माना जाएगा। इसीलिए स्थानीय प्रशासन को स्थिति के आकलन के बाद अपने इलाके में नए प्रतिबंध लगाने की छूट भी दी गई है।

संक्रमण को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कंटेनमेंट जोन बनाने और उन्हें वेबसाइट पर दिखाने को कहा है, ताकि इसके बारे में किसी तरह की गलतफहमी नहीं रहे। इन कंटेनमेंट जोन में जरूरी सेवाओं के अलावा किसी गतिविधि की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जा सकती है। छ्व बाजारों में शारीरिक दूरी की व्यवस्था राज्यों की जिम्मेदारी। छ्व प्रावधानों के उल्लंघन पर तय हो अधिकारियों की जवाबदेही। छ्व मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना लगाने का राज्यों का कदम सही। छ्व स्थिति पर नियंत्रण के लिए रात का कफ्र्यू लगा सकते हैं राज्य। छ्व केंद्र से सलाह के बिना लोकल लॉकडाउन की अनुमति नहीं। छ्व कार्यक्रमों में आने वालों की संख्या कम कर सकते हैं राज्य। कोरोना महामारी को लेकर चिंतित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में बन रही कोरोना वायरस विरुद्ध वैक्सीन का जायजा लेने के लिए देश की तीन प्रयोगशालाओं अहमदाबाद की जायडस कैडिला, हैदराबाद में भारत बायोटेक केंद्र और पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट का दौरा भी किया है और स्वदेशी डीएनए आधारित वैक्सीन के विकास को लेकर वैज्ञानिकों को जहां बधाई दी वहीं सभी से वैक्सीन निर्माण में हुई प्रगति का जायजा भी लिया।
सरकार अपने स्तर पर जो संभव है वह कर रही है। लेकिन जन साधारण अभी भी  कोरोना के प्रति लापरवाह ही दिख रहा है, जिस कारण एक बार फिर कोरोना महामारी के कारण हालात बदतर होते चले जा रहे हैं। जब तक कोरोना के लिए वैक्सीन बाजार में न आ जाए तब तक कोरोना को लेकर जो सावधानियां स्वास्थ्य मंत्रालय व गृह मंत्रालय ने रखने को कही हैं वह राज्य की सरकारों और समाज को रखनी होंगी। इसी से बदतर होते हालात पर काबू पाया जा सकता है।   

- इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।