फिर से सिर उठाने लगा कोरोना 

महाराष्ट्र और देश के कुछ अन्य राज्यों में फिर से वैश्विक महामारी कोरोना ने सिर उठाया है। बीता साल 2020 वैश्विक महामारी कोरोना से बहुत बुरी तरह प्रभावित रहा। इस महामारी ने लगभग पूरी दुनिया का भारी जान-माल का नुकसान किया। दुनिया के अभी भी कुछ देश इस महामारी की चपेट में हैं। खबरें यह भी है कि कुछ देश इस महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन का सहारा भी ले रहे हैं। भारत में कोविड-19 के 13,742 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,10,30,176 हुई। 104 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या  1,56,567 हो गई है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या अब 1,46,907 है और डिस्चार्ज हुए मामलों की कुल संख्या 1,07,26,702 है।    
आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो कोरोना वायरस का संक्रमण बीते 5-6 दिनों से लगातार बढ़ रहा है। ऐसा नहीं है कि यह कोरोना की नई नस्लों के कारण हो रहा है, लेकिन संक्रमण का राष्ट्रीय औसत बढ़ा है। रोजाना संक्रमित मामलों का जो औसत 11,430 था, वह बढ़कर 11,825 हो गया है। करीब 139 करोड़ की आबादी के देश में मरीजों की यह बढ़ती संख्या डरावनी नहीं मानी जा सकती, लेकिन संक्रमण का रुझान खंडित हुआ है। भारत के 15-18 राज्यों में कोरोना संक्रमण का फैलाव नगण्य हो गया था। अलबत्ता केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और तेलंगाना आदि राज्यों में संक्रमित मरीजों के आंकड़े औसतन बढ़ ही रहे थे। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार अलर्ट हो गई है। अब 5 राज्यों से दिल्ली जाने वाले लोगों को कोरोना नैगेटिव रिपोर्ट दिखाना जरूरी होगा। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल और पंजाब से दिल्ली आने वाले लोगों को नैगेटिव रिपोर्ट दिखाने पर ही दिल्ली में एंट्री मिलेगी। नियम 27 फरवरी से 15 मार्च तक लागू रहेगा।
महाराष्ट्र में गुरुवार को 5427 संक्रमित मामले सामने आए। बीते 78 दिनों में यह रुझान पहली बार देखा गया है। बीते सात दिनों में महाराष्ट्र में करीब 47 फीसदी मामले बढ़े हैं, जबकि केरल में 13 फीसदी कम हुए हैं। पंजाब और मध्यप्रदेश में क्रमश: 20 फीसदी और 25 फीसदी संक्रमित मरीज बढ़े हैं। यही कारण है कि महाराष्ट्र सरकार को यवतमाल जिले में 10 दिन और अमरावती में शनिवार रात्रि 8 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक के लॉकडाउन लगाने पड़े हैं।
कुछ और जिलों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियों पर विचार किया जा रहा है। सवाल है कि क्या कोरोना दोबारा पलट कर फैलने लगा है? अथवा सार्वजनिक स्तर पर  लापरवाही और ढिलाई का नतीजा है? ध्यान रहे कि नवंबर-दिसंबर में चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस का कहर अभी शेष है। चूंकि दूसरे देशों में कोरोना और उसकी नई नस्लों ने संक्रमण को बढ़ाया है, लिहाजा भारत भी प्रभावित हो सकता है, बेशक वायरस की नई नस्लें हमारे देश में प्रभावहीन हों! चूंकि भारत में कोरोना के संक्रमित आंकड़े तेजी से घट रहे थे, हमने रोजाना 98,000 से अधिक संक्रमित मरीजों का दौर भी देखा था और अब सिमट कर आंकड़े 13,000 के करीब तक आ गए हैं, कई बार तो मरीजों की संख्या 10,000 से कम भी दर्ज की गई है, लिहाजा आम धारणा बनने लगी कि कोरोना वायरस का अंत तय हो चुका है। लोगों ने कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के जो यंत्रणामय मंजर देखे थे, वे उससे निजात पाकर और मुक्त महसूस कर एक सामान्य जिंदगी जीना चाहते थे, लेकिन अब कोरोना का सच साक्षात् सामने है। लोगों ने चेहरे पर मास्क पहनना कम कर दिया था या सरकारों ने भी दंडित करने का सिलसिला रोक दिया था। बाजार खुल गए। यातायात सामान्य होने लगा। हजारों की संख्या वाली राजनीतिक और अन्य जनसभाएं जुटने लगीं। अब तो सिनेमा हॉल भी 100 फीसदी क्षमता के साथ खोलने की अनुमति दे दी गई है। दो गज की दूरी बेमानी हो गई। देश का विभिन्न स्तरों पर अनलॉक होना जरूरी भी था, क्योंकि अर्थव्यवस्था की विकास दर ऋणात्मक 24 फीसदी तक डूब चुकी थी। 
अब भी यह दर ऋणात्मक ही है। हमें आर्थिक और औद्योगिक उत्पादन के तौर पर उबरने और सकारात्मक अर्थव्यवस्था होने में अब भी लंबा वक्त लगेगा। नतीजा सामने है, लेकिन व्यापक और दहशतनुमा नहीं है। डॉक्टर अब भी चेता रहे हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण पलट कर प्रहार कर सकता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी चपेट में आ सकती है। हालांकि संक्रमण के मामले 100-130 रोजाना तक सिमट गए हैं, फिर भी सब कुछ अनिश्चित है। अब तो टीकाकरण कराने वालों की संख्या एक करोड़ को छूने लगी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात समेत 12 राज्यों में 75त्न से ज्यादा हैल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीन का कम से कम पहला डोज दिया गया है। अब तक एक करोड़ 19 लाख 7 हजार 392 लोगों को वैक्सीन डोज दिए गए हैं। इनमें 64 लाख 71 हजार 47 हैल्थकेयर वर्कर्स को पहला डोज दिया है, जबकि 13 लाख 21 हजार 635 हैथकेयर वर्कर्स को दूसरा डोज भी दिया जा चुका है। पहले फेज में 16 जनवरी को हैल्थकेयर वर्कर्स का टीकाकरण शुरू हुआ था।
फिलहाल हमारे पास दो कंपनियों के ही टीके हैं, जिनकी संख्या आने वाले 3-4 माह के दौरान काफी बढ़ जाएगी। अब तो इलाज भी उपलब्ध है। कभी इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या 10 लाख से भी ज्यादा होती थी। अब तो सिर्फ  1.5 लाख मरीजों से भी कम की संख्या है। यह संक्रमण का 1.25 फीसदी है। कोरोना से मरने वालों की दर भी मात्र 1.42 फीसदी है, जबकि स्वस्थ होकर घर लौटने वालों का राष्ट्रीय औसत 97.32 फीसदी है। हालात खराब नहीं हैं और संक्रमण का निरंकुश विस्तार भी नहीं हो रहा है। फिर भी कोरोना को लेकर रैेड अलर्ट वाला एहसास रहना चाहिए। इन सबके बीच महाराष्ट्र राज्य से खबर है कि वहां कुछ क्षेत्रों में फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ा है। कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या फिर से बढऩे लगी है। वास्तव में इस स्थिति के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। दो गज की दूरी, मास्क पहनना तथा हाथों को साफ रखना जैसी ऐहतियात की ओर अब हम कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि कोरोना फिर से उग्र होने लगा है। महाराष्ट्र हो या कोई अन्य राज्य, अगर हम कोरोना से सुरक्षा के उपाय नहीं करेंगे तो हर जगह ऐसी स्थिति हो सकती है। इसलिए अगर कोरोना से बचना है तो हमें सुरक्षा के उपाय करने ही होंगे। अब हमारा देश कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से अनलॉक की ओर बढ़ चुका है। लेकिन आम जनता को चाहिए कि कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्क रहें और अगर किसी को भी इस वायरस के लक्षण खुद में या किसी जान-पहचान वाले में नजर आएं तो वे फौरन अस्पताल जाएं और ऐसे लोग घर से निकलने में परहेज करें।

-डॉ. श्रीनाथ सहाय
(लेखक राज्य मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं)