कांग्रेस को नहीं मिलेगा बहुमत!

लोकसभा चुनाव के पांच चरण पूरे हो चुके हैं और ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत करते हुए कहा है कि कांग्रेस को वर्तमान लोकसभा चुनाव में बहुमत मिलने की संभावना नहीं है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में ही गठबंधन सरकार बन सकती है। कांग्रेस के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा है कि 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ही विपक्षी दल भावी प्रधानमंत्री बारे मंथन करेंगे। 

समाजवादी पार्टी के नेता व अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक टी.वी.चैनल से बातचीत के दौरान कहा है कि अगर नरेन्द्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो उन्हें खुशी होगी। हम उनका रास्ता नहीं रोक रहे वहीं कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस ने मुलायम सिंह यादव और डिम्पल यादव के खिलाफ सीबीआई जांच बिठाई थी। केंद्र में समर्थन की बात पर अखिलेश ने कहा कि 23 मई को परिणाम आने के बाद बसपा नेता मायावती से सलाह कर अपने समर्थन की घोषणा करेंगे।

उपरोक्त तथ्यों से एक बात तो स्पष्ट है कि उत्तर भारत में भाजपा के कट्टर विरोधी दल कांग्रेस और सपा के नेता मानकर चल रहे हैं कि चुनावी परिणाम भाजपा नेतृत्व में नरेन्द्र मोदी सरकार के हक में ही आने वाले हैं। कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि चुनाव परिणाम आने के बाद गठबंधन की संभावना है, लेकिन सपा और बसपा ने कांग्रेस प्रति जो नीति अपनाई हुई है उससे स्पष्ट है कि बसपा और सपा किसी हालात में कांग्रेस के साथ जाने को तैयार नहीं होगी।

बसपा और सपा की नजर अब 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर है और इसमें वह कांग्रेस को एक बाधा के रूप में देखते हैं। कांग्रेस भी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर नजर रख कर ही लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लडऩे की नीति बना मैदान में उतरी है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल अगर राहुल गांधी को जनता द्वारा बतौर देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार न करना है तो राहत यह है कि गांधी परिवार के प्रति जन साधारण का मोह अभी बना हुआ है। इस बात का लाभ प्रियंका गांधी वाड्रा को मिल भी रहा है। उत्तर प्रदेश में बसपा, सपा के साथ गठबंधन न होने का भी मुख्य यही कारण है।

बसपा, सपा, कांग्रेस, आप सहित सभी राजनीतिक दलों प्रति लोग एक सीमा तक आशा भरी निगाहों से देखते रहे हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद जिस तरह की रणनीति उपरोक्त दलों ने अपनाई और जिस तरह एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर एक-दूसरे पर आरोप लगाये उससे सभी दलों की साख कमजोर ही हुई। अरविंद केजरीवाल तो राजनीति में चमके ही कांग्रेस का विरोध करके थे, लेकिन दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए जिस प्रकार की दलीलें और मिन्नतें केजरीवाल ने की हैं उससे उनकी व्यक्तिगत छवि के साथ-साथ आप की छवि भी कमजोर हुई है।

उपरोक्त तीनों राजनीतिक दलों सहित और अन्य क्षेत्रीय दलों ने भाजपा तथा नरेन्द्र मोदी के अंधविरोध में जो कुछ कहा और किया उससे भाजपा व मोदी को चुनावी मैदान में लाभ ही हो रहा है। वर्तमान राजनीतिक स्थिति विशेषतया उत्तर भारत में तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में भाजपा विरोधियों के पास कोई नेता ही नहीं दिखाई दे रहा। पार्टियां भी भाजपा का विरोध प्रदेश स्तर पर करती दिखाई दे रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कमजोर स्थिति को देखते हुए ही चुनावों के पांच चरण पूरे होने के बाद कांग्रेस, बसपा व सपा सहित अन्य दलों को यह बात समझ में आ गई है कि न तो वह मोदी को रोक सकते हैं और न ही महागठबंधन बनाकर सत्ता में वापसी कर सकते हैं। अखिलेश यादव व कपिल सिब्बल के बयान सत्य को दर्शातेे दिखाई दे रहे हैं।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।