संकट में कांग्रेस

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की जिम्मेवारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना त्यागपत्र दिया था। त्यागपत्र को पार्टी ने स्वीकार नहीं किया और उनसे इस्तीफा वापिस लेने के लिए कांग्रेसी के सांसदों से लेकर साधारण कार्यकर्ता तक ने दबाव बनाने का प्रयास किया लेकिन अभी तक सभी असफल ही रहे। राहुल ने बढ़ते दबाव को दरकिनार करते हुए पिछले दिनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित पत्र में त्यागपत्र की घोषणा भी की और अपने दिल का दर्द भी कहा। राहुल गांधी ने लिखा, मैंने संघर्ष किया क्योंकि मैं भारत से प्यार करता हूं। देश ने जिन आदर्शों का निर्माण किया था मैंने उनकी रक्षा के लिए संघर्ष किया। कई बार मैं पूरी तरह से अकेला खड़ा था और मुझे इस पर गर्व है। 

राहुल ने लिखा, मुझे भाजपा से कोई क्रोध या घृणा नहीं है, लेकिन मेरे शरीर में मौजूद एक-एक बूंद खून उनके विचार का प्रतिरोध करता है। यह लड़ाई हजारों वर्षों से चली आ रही है। जहां वे घृणा देखते हैं, वहां मैं प्रेम देखता हूं। जहां वे डराते हैं, वहां मैं गले लगाता हूं। यह भारत का विचार है, जिसकी हम रक्षा करते हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि संविधान पर हमला देश के ताने-बाने को नष्ट करने के लिए है। मैं इस लड़ाई से पीछे नहीं हटूंगा। मैं कांग्रेस का समर्पित सिपाही और देश का समर्पित बेटा हूं। पार्टी हमेशा मेरे जीवन का अमिट हिस्सा रहेगी। 

राहुल ने कहा कि मैंने पूरे दमखम से प्रधानमंत्री, आरएसएस और उन संस्थाओं से संघर्ष किया जिन पर इन्होंने कब्जा किया है। निष्पक्ष चुनाव के लिए स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी तथा निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। जब तक सभी वित्तीय संसाधनों पर एक पार्टी का कब्जा होगा, निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। हमने किसी दल का सामना नहीं किया बल्कि, पूरी सरकारी मशीनरी के खिलाफ लड़े। हर संस्था को विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। अब तक जिन संस्थाओं की निष्पक्षता की हम सराहना करते थे, वे निष्पक्ष नहीं रहीं। 

राहुल गांधी ने अपनी स्थिति तो स्पष्ट कर दी है, लेकिन कांग्रेस में भावी प्रधान को लेकर जो अनिश्चितता का दौर चल रहा है, उस कारण पार्टी का संकट बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के कई नेता अपने दल की आंतरिक स्थिति को देखते हुए अन्य पार्टियों का दामन थामने लगे हैं। कर्नाटक में दस कांग्रेसी विधायकों ने त्यागपत्र दे दिया है। अगर इनके त्यागपत्र स्वीकृत हो जाते हैं तो कर्नाटक में सरकार और कांग्रेस पार्टी का संकट बढ़ जाएगा।

अनिर्णय और अनिश्चितता से घिरी कांग्रेस का संकट तभी समाप्त होगा जब पार्टी अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लेगी। अगर कांग्रेस ऐसा करने में देरी करती है तो संकट और गहरा भी सकता है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि, 'राहुल गांधी के इस्तीफे के दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय के बाद पार्टी को इस समय एक युवा नेता की ही जरूरत है। उन्होंने कहा, 'सीडब्ल्यूसी से मेरा आग्रह है कि किसी ऐसे करिश्माई युवा नेता को ही पार्टी की कमान सौंपने के बारे में सोचे, जो अपनी देशव्यापी पहचान और जमीन से जुड़ाव के जरिए लोगों को उत्साहित कर सके। सिंह ने किसी युवा नेता को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उस वक्त उठाई है, जब पार्टी के अगले अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इनमें गांधी के इस्तीफे की घोषणा के बाद से ही ज्यादातर वरिष्ठ नेता नये अध्यक्ष को लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। अमरिंदर सिंह पार्टी के पहले ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस के अगले अध्यक्ष को लेकर अपनी राय खुलकर जाहिर की है। समय की मांग है कि कांग्रेस समय रहते अपना भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन ले वर्ना पार्टी के विघटन को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।