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संसद में हंगामा

Politics
संसद में हंगामा

पेगासस जासूसी विवाद व नये कृषि कानूनों को लेकर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे हंगामे के कारण संसद का काम-काज एक तरह से ठप्प ही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर पेगासस मामले को लेकर चर्चा से भागने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार नहीं हो जाती, तब तक संसद में गतिरोध खत्म नहीं होगा। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कई विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी में संवाददाताओं से कहा कि सरकार को सभी दलों की बैठक बुलानी चाहिए और पेगासस जासूसी प्रकरण पर चर्चा के लिए तैयार होकर इस गतिरोध को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।  उन्होंने कहा, 'हमने पेगासस और किसानों का मुद्दा उठाया। सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है। हम चाहते हैं कि उच्चतम न्यायालय की निगरानी में पेगासस मामले की जांच हो। फ्रांस, हंगरी, जर्मनी और कई अन्य देशों में जांच चल रही है। हमारी सरकार जांच के लिए क्यों तैयार नहीं हो रही? क्या यह सरकार खुद जासूसी कर रही है या कोई और है?Ó उन्होंने तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी किसी मुद्दे का लोकतांत्रिक ढंग से समाधान करने को तैयार नहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय, सपा के रामगोपाल यादव, द्रमुक के तिरुची शिवा, भाकपा के विनय विश्वम और आप के संजय सिंह ने भी चर्चा कराए जाने की मांग की।
गौरतलब है कि लोकसभा में हो रहे हंगामे को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा है कि विरोध करने का उनका तरीका ठीक नहीं। सारा देश उनके व्यवहार को देख रहा है, विपक्षी दलों के व्यवहार को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा सांसदों को विपक्षी दलों के रवैया को देखते हुए उनकी पोल खोलने की बात कही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल जानबूझकर ऐसा व्यवहार कर रहे हैं ताकि सरकार गतिरोध दूर करने के अपने प्रयासों में सफल न हो। इस कड़ी में उन्होंने सरकार की ओर से गतिरोध दूर करने के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री द्वारा कोविड-19 की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का कांग्रेस द्वारा बहिष्कार किए जाने का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस खुद तो कर ही रही है, अन्य विपक्षी दलों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने सांसदों से कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के इस रवैये की जनता के समक्ष पोल खोलने की आवश्यकता है।
संसदीय लोकतंत्र की सफलता में जिस तरह पक्ष की भूमिका महत्त्वपूर्ण है, उसी तरह विपक्ष की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण है। बुनियादी तौर पर विपक्ष के होने से ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली है, इसलिए पक्ष और विपक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू कहे जा सकते हैं। संसदीय प्रणाली में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है। यह लोकतंात्रिक प्रणाली का गुण है। लेकिन जब जनहित व राष्ट्रहित को भूलकर केवल विरोध के लिए विरोध करने वाली स्थिति आ जाती है तो यह संसदीय प्रणाली के लिए ही हानिकारक व आत्मघातक हो जाती है।
विपक्ष ने जिन तीन मुद्दों को लेकर सरकार से चर्चा करने को कहा है, सरकार तो पहले से ही चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद सरकार का मात्र विरोध के लिए विरोध करना राष्ट्रहित में नहीं है। इस बात को समझते हुए विपक्षी दलों को अपनी बात संसद में रखनी चाहिए ताकि सत्य जनता के सामने आ सके।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू

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