1 करोड़ के घपले के आरोपी सरकारी स्कूल के क्लर्क ने किया आत्मसमर्पण

-स्कूल के प्रधानाचार्य से मिलकर मारी थी ठगी 
नंगल (अशोक चोपड़ा): उपमंडल नंगल के गांव कुलग्रां के सरकारी हाई स्कूल में लगभग 1 करोड़ रुपए के घपले के कथित आरोपी क्लर्क ने आखिर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर ही दिया और अब उक्त क्लर्क 15 अक्तूबर तक पुलिस रिमांड पर है। 

गौरतलब है कि उपमंडल नंगल के गांव कुलग्रां के सरकारी हाई स्कूल के एक क्लर्क ने स्कूल के प्रधानाचार्य से मिलकर लगभग 1 करोड़ की ठगी मारी और किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगने दी और जाली बिल बनवा कर उक्त राशी अपने दो बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली और वित्त विभाग ने भी इसकी जांच करवाना मुनासिब नहीं समझा।

इस मामले की पुष्टि करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (सी.स) राज कुमार खोसला ने कहा कि उक्त घपलेबाजी का खुलासा तब हुआ जब ऑडिट टीम ने स्कूल का ऑडिट किया और ऑडिट विभाग की टीम द्वारा जो दोष लगाए गए थे उनकी जांच हेतु जिला स्तरीय एक कमेटी का गठन किया गया था जिसमें प्रिंसीपल मेजर सिंह व प्रिंसीपल अवतार सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इस मामले की जांच के उपरांत 11 मई 2020 को जिला पुलिस प्रमुख के पास उक्त क्लर्क व स्कूल के प्रधानाचार्य के खिलाफ शिकायत की गई थी और पुलिस द्वारा की गई मुक्कमल जांच के उपरांत 16 जून को नंगल पुलिस द्वारा स्कूल के क्लर्क राजीव कुमार व स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार के खिलाफ मुकद्दमा नंबर 118 के तहत 99 लाख 27 हजार 517 रुपए का घपला करने का मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि कथित आरोपी क्लर्क ने घपले का पैसा एसबीआई बैंक के खाता नंबर 11070882238 व 65003115303 में जमा करवाई थी।
यह है पूरा मामला
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार स्कूल के समस्त कर्मियों का वेतन व अन्य बिलों का भुगतान विभाग द्वारा जारी डोंगल के माध्यम से ही वित्त कार्यलय में जमा करवाए जाते हैं और जीपीएफ सहित अन्य बिल भी उक्त क्लर्क द्वारा ही बनाए जाते थे और खुद ही डोंगल के माध्यम से यह बिल पास करवाने के साथ-साथ हार्ड कापी पर स्कूल के प्रधानाचार्य से हस्ताक्षर भी करवा लिए जाते थे। स्कूल प्रधानाचार्य कैश बुक में स्कूल से संबंधित कर्मचारियों के नाम देखकर ही हस्ताक्षर किए जाते रहे जबकि ईसीएस (इलैक्ट्रोनिक करीयरिंग सर्विस) से कोई मिलान नहीं किया,यही बस नहीं कथित आरोपी क्लर्क ने एक फर्जी साइंस शिक्षक राजीव कुमार के जीपीएफ खाते से 18 लाख रुपए की राशी निकाल अपने बैंक खाते में जमा करवा ली। यह मामला जब शिक्षा विभाग के निदेशक के ध्यान में आया तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए कथित आरोपी क्लर्क के बैंक खाते सील करवा दिए। इस पूरे मामले में जहां स्कूल प्रधानाचार्य की लापरवाही सामने आ रही है। वहीं वित्त कार्यलय नंगल पर भी सवालिया निशान लगे थे। जानकारी के अनुसार उक्त क्लर्क को अनुकंपा के आधार पर अपनी माता की नौकरी 15 सितंबर 2006 मिली थी और 9 अगस्त 2018 तक उसने इसी स्कूल में काम किया जिसके उपरांत उसकी बदली सरकारी सी.स. स्कूल काहनपुर खुही में हो गई थी लेकिन बावजूद इसके 31 अक्तूबर 2018 तक सरकारी हाई स्कूल के बिल भी तैयार किए और वित्त कार्यलय से पास भी करवाए।