चीन का पैंतरा होगा फेल, भारत ने नॉर्दर्न लद्दाख इलाके में तैनात किए हैवी टैंक

09:01 PM Aug 03, 2020 |

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)- चीन की कायराना हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना कड़ा रुख अपनाए हुए है। जहां एक तरफ चीन लगातार सरहद के पास सेना की बढ़ोतरी करता जा रहा है वहीं भारत ने भी नॉर्दर्न लद्दाख इलाके में सेना की तैनाती बढ़ा दी है। सरकारी सूत्रों ने आज एक न्यूज एजेंसी को बताया, 'हमने डीबीओ और डेपसांग मैदानी क्षेत्र में टी -90 रेजीमेंट सहित सेना और टैंकों की बहुत भारी तैनाती की है।' सूत्रों के मुताबिक काराकोरम दर्रे (PP-3) के पास डेपसांग मैदानों के पास पैट्रोलिंग पॉइंट 1 से तैनाती की गई है। बख़्तरबंद तैनाती ऐसी है कि चीनी को वहां काम करना मुश्किल होगा। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले कि चीनी डीबीओ और डेपसांग में किसी प्रकार का निर्माण शुरू करे इसके लिए पूरे क्षेत्र की पेट्रोलिंग एक ब्रिगेड और एक बख्तरबंद ब्रिगेड द्वारा की जाती थी, लेकिन आज 15,000 से अधिक सैनिकों और कई टैंक रेजिमेंटों को सड़क और हवाई मार्ग से दोनों जगह तैनात कर दिया गया है।


सरकारी सूत्र ने बताया कि टैंकों की मौजूदगी के चलते चीन के सैनिक कोई भी हिमाकत करने से बचेंगे। उनके लिए इस स्थिति में ऑपरेट करना मुश्किल होगा। डीओबी और देपसान्ग प्लेन्स के दूसरी तरफ के इलाके में चीन ने जब अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना शुरू किया था, तब यहां भारतीय सेना की माउंटेन ब्रिगेड और आर्मर्ड ब्रिगेड ही निगरानी करती थी। 

न्यूज एजेंसी ने सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि इन दोनों इलाकों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से मुस्तैद है। सैना की तैनाती काराकोरम दर्रे के पास पेट्रोलिंग प्वाइंट 1 से लेकर डेपसांग प्लेन्स तक की गई है। इस इलाके में चीन के 17 हजार जवान मौजूद हैं। चीन ने अपने सैनिकों की तैनाती अप्रैल से मई के बीच में की है। इसके बाद से वे इस इलाके में पीपी-10 से पीपी-13 तक भारतीय सेनाओं को निगरानी से रोक रहे हैं।


बता दें कि गलवान घाटी में 15 जून की रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें एक कर्नल समेत भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। इसके साथ ही खबर आई थी कि इस झड़प में चीन के भी करीब 40 जवान हताहत हुए थे। हालांकि, चीन ने अपने सैनिकों के मारे जाने की खबर से इनकार कर रहा था। वहीं, भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने सैनिकों की शहादत की खबर को स्वीकार किया था। इस खूनी झड़प के बाद से ही सीमा पर गतिरोध बढ़ गया था।