मुख्यमंत्री ने प्रदेश के वार्षिक मानक आबंटन में वृद्धि का मामला नाबार्ड के समक्ष उठाया

शिमला (ऊषा शर्मा): मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए प्रदेश का वार्षिक मानक आवंटन वर्तमान 700 करोड़ रुपये से कम से कम 1000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का मामला नाबार्ड से उठाया गया है। मुख्यमंत्री आज यहां नाबार्ड के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आवंटन में वृद्धि से राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संबंधी अधोसंरचना सृजित करने के साथ-साथ इन क्षेत्रों में सडक़ नेटवर्क में सुधार में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वीकृति की शक्तियां नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को मिलनी चाहिए ताकि ग्रामीण अधोसंरचना विकास निधि (आरडीआईएफ) के अन्तर्गत स्वीकृतियों और कार्यान्वयन प्रक्रिया में तेजी आ सके। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के दृष्टिगत नाबार्ड को परियोजना कार्यान्वयन के लिए समयावधि को चार वर्ष से बढ़ाकर छ: वर्ष करने पर विचार करना चाहिए। इससे धीमी गति से चल रही अथवा आरम्भ नहीं हुई परियोजनाओं में कमी आएगी और प्रदेश की प्रतिपूर्ति की स्थिति में भी सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में परियोजनाओं के तीव्र कार्यान्वयन और इन पर शीघ्र कार्य पूरा करने तथा प्रतिपूर्ति के दावों में कागजी कार्यवाही में होने वाले विलम्ब को समाप्त करने के लिए नाबार्ड को अग्रिम मोबेलाइजेशन वर्तमान 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने पर भी विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विषम जलवायुगत परिस्थितियों के कारण प्रदेश में सडक़ परियोजनाओं को पूरा करने में आम तौर पर 6 से 10 वर्ष का समय लग जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए नाबार्ड को रख-रखाव की निधि की अवधि 10 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त रख-रखाव निधि चार प्रतिशत से कम निर्धारित ब्याज दर प्रदान की जानी चाहिए।