भारत में मिली गिरगिट जैसे रंग बदलने वाली अनोखी मछली, देखें तस्वीरें

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): वैसे तो आज तक हमने गिरगिट को ही रंग बदलते हुए देखा है, लेकिन ये पहली बार सुना है कि एक मछली अपनी रंगे बदलती हो। जी हां ये बिल्कुल सच है। देश में पहली बार एक ऐसी दुर्लभ प्रजाति की मछली मिली है, जो रंग बदलने में माहिर है। यह जहरीली स्कॉर्पियन फिश शिकार करने और अपना बचाव करने के लिए तुरंत अपना रंग बदल लेती है। 

 इस रंग बदलने वाली मछली को सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट (CMFRI) के वैज्ञानिकों ने खोजा है. इस मछली का नाम स्कॉर्पियनफिश (Scorpionfish) है जिसकी कुछ तस्वीरें CMFRI ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है.

इस रंग बदलने वाली मछली को सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट (CMFRI) के वैज्ञानिकों ने खोजा है। इस मछली का नाम स्कॉर्पियनफिश है जिसकी कुछ तस्वीरें CMFRI ने अपने टि्वटर पर शेयर किया है।

सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट के डॉ. जेयाबास्करन ने बताया स्कॉर्पियनफिश को मन्नार की खाड़ी में पाया गया है जिस समय इसे देखा गया यह घास में छिपी हुई थी। इस तरह की फिश की खोज देश में पहली बार की गई है।

 सेंट्रल मरीन फिशरीज इंस्टीट्यूट के डॉ. जेयाबास्करन ने बताया स्कॉर्पियनफिश को मन्नार की खाड़ी में पाया गया है. जिस समय इसे देखा गया यह घास में छिपी हुई थी. इस तरह की फिश की खोज देश में पहली बार की गई है.

CMFRI के साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह मछली अपनी की रीढ़ की हड्डी में जहर को स्टोर कर के रखती है। गंभीर स्थिति में ये अपना रंग बदलने में इसका उपयोग करती है।

स्कॉर्पियन फिश का वैज्ञानिक नाम स्कॉर्पिनोस्पिसिस नेगलेक्टा है। इसकी खासियत यह है कि ये अपना रंग मात्र 4 सेकेंड में ही बदल लेती है। यह बहुत ही जहरीली होती है। इसके सेंसरी ऑर्गन पूंछ में होते हैं जो बहुत ही तेज होते हैं।

 CMFRI के साइंटिस्ट्स का कहना है कि यह मछली अपनी की रीढ़ की हड्डी में जहर को स्टोर कर के रखती है. गंभीर स्थिति में ये अपना रंग बदलने में इसका उपयोग करती है.