Friday, November 16, 2018 02:25 AM

देश की अखण्डता को चुनौती

15 अगस्त को देश में स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए जहां जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं, वहीं देश के बाहर इग्लैंड में देश की अखण्डता को चुनौती देने वाले संगठन सिख फॉर जस्टिस के नेतृत्व में रेफरेंडम 2020 के प्रचार हेतु आज 12 अगस्त को रोष प्रदर्शन का आयोजन हो रहा है। इस प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में इंग्लैंड के उच्चायुक्त ने अपने ट्वीटर हेंडल पर कहा है कि उनके देश में प्रत्येक नागरिक को कानून के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है इसलिए वह 12 अगस्त को रेफरेंडम 2020 के लिए प्रदर्शन करने वाले सिखों को रोक नहीं सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वह कानून को तोड़ते हैं, तनाव पैदा करते हैं और घृणा फैलाने वाला काम करते हैं तो पुलिस को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के पूरे अधिकार हैं। 

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने दावा किया है कि प्रदेश में रेफरेंडम 2020 को कोई पूछने वाला नहीं है और लंदन में 12 अगस्त को रैली मुट्ठी भर कुंठित आई.एस.आई. समर्थित विदेशों में बसे सिखों की है जिसका उद्देश्य पंजाब और भारत में समस्या पैदा करना है। पत्रकारों से बातचीत में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह ऐसे तत्वों और प्रस्तावित रैली को लेकर चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह तत्व काफी समय से ऐसी कोशिशों में लगे हैं और आई.एस.आई. के हाथों खेल रहे हैं। उन्होंने कहा लेकिन वह पंजाब में किसी को शांति भंग नहीं करने देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसे तत्त्वों को लगता है कि वह इस देश या राज्य की शांति भंग कर सकते हैं तो वे गलतफहमी में है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस को ऐसे तत्त्वों से कड़़ाई से निपटने के निर्देश हैं तथा पिछले सवा साल में पुलिस ने कई आतंकी माड्यूल का पर्दाफाश किया है और बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद व मादक पदार्थ जब्त किए हैं। 

यूनाइटेड किंगडम की सरकार के 2020 जनमत संग्रह रैली को रोकने से इंकार करने के बारे में सवाल पूछने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इसकी परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि पूरा मामला सिख्स फॉर जस्टिस का पैसा कमाने का तरीका है। जहां तक पंजाब की बात है, यहां की जनता अमन और विकास चाहती है, इसलिए राज्य में उक्त अभियान को कोई प्रतिसाद नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने एस.एफ.जे. की निंदा करते हुए कहा कि यह फर्जी संगठन है जो कोई मानवाधिकार कार्य नहीं करता। उन्होंने कहा कि यू.के., कनाडा, अमरीका और जर्मनी में बसे चंद कुंठित सिख हैं जो अभियान का समर्थन कर रहे हैं पर अभियान लंबे समय तक नहीं चलने वाला। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, हम खालिस्तानी तत्वों से निपटने के लिए तैयार हैं। यदि वह हथियारों के साथ आ रहे हैं तो मेरी उन्हें सलाह है कि हथियार डाल दें वरना उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।

अकाली दल बादल की सांसद एवं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा है कि रेफरेंडम 2020 के पीछे पाकिस्तान का हाथ है और आई.एस.आई. फंडिंग कर रही है। पंजाब के पुलिस प्रमुख सुरेश अरोड़ा अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. पंजाब में एक बार फिर माहौल खराब करने के लिए विदेशी धरती से चलाए जा रहे रेफरेंडम 2020 को न सिर्फ आर्थिक मदद पहुंचा रहा है बल्कि सोशल मीडिया के जरिए पंजाब में उसे प्रमोट कर रही है। आप्रेशन एक्सप्रैस नाम से चलाए जा रहे इस अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियों ने फिलहाल ब्लॉक कर दिया है। डी.जी.पी. सुरेश अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के लोगों ने नफरत फैलाने वाली ताकतों को पहले ही मुंह नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि वह हालात पर नजर बनाए हुए हैं खासकर 12 अगस्त को लंदन में सिख्स फॉर जस्टिस द्वारा करवाए जा रहे रेफरेंडम 2020 पर क्योंकि यह सनसनी फैलाने की कोशिश है। 

उन्होंने कहा कि ऐसे तत्त्वों से निपटने में पंजाब पुलिस सक्षम है। अमेरिका में बसे कुछ खालिस्तानी समर्थकों से जुड़े सिख्स फार जस्टिस की गतिविधियों को देखते हुए पाक खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. ने इसका फायदा उठाया है। एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं जिसके जरिए यह साफ हुआ है कि आई.एस.आई. रेफरेंडम 2020 मुहिम को आर्थिक मदद दे रही है और सोशल मीडिया पर इसे प्रचारित किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने सिख्स फॉर जस्टिस के अमेरिका, कनाडा और जर्मनी यहां तक कि गैंगस्टरों के साथ आई.एस.आई. की आनलाइन गतिविधियों को ट्रेक कर लिंक को तलाश लिया है। सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब और पंजाब साहिब में रेफरेंडम 2020 के पोस्टर पाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक आई.एस.आई. परमजीत सिंह पम्मा के जरिए इस अभियान को फंडिंग कर रही है। पम्मा पर रुल्दा सिंह की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप है। 

ऑल इंडिया एंटी टैरोरिस्ट फ्रंट के प्रधान मनिन्द्रजीत सिंह बिट्टा के नेतृत्व में यू.के. के दिल्ली स्थित दूतावास के सामने हजारों लोगों के साथ रेफरेंडम 2020 विरुद्ध प्रदर्शन किया और कहा कि यह एक ड्रामा है और लोगों में दहशत फैलाने की बड़ी साजिश है। पंजाब में न खालिस्तान बना है, न ही बनेगा और न ही कभी बनने देंगे। पंजाब ने लम्बे समय तक आतंकवाद का संताप भोगा है। सैकड़ों कुर्बानियों के बाद पंजाब में अमन-शांति लौटी है। रेफेरेंडम की बात करने वाले सिख्स फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू और परमजीत सिंह पम्मा आई.एस.आई. की कठपुतलियां हैं और उसके इशारों पर नाच रही हैं। इसलिए किसी भी कीमत पर पंजाब में खालिस्तान नहीं बनने दिए जाएगा। 

इसके लिए हमारा फ्रंट हर कुर्बानी देने को हमेशा तैयार है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की पहले  पंजाब में फिर कश्मीर में दशहत फैलाने की साजिशें नाकाम हो रही हैं। जब कोई मोर्चे पर आई.एस.आई फेल हो जाती है तो दूसरे राज्य में दहशत फैलाने के लिए चाल चलते हुए मोर्चा खुलवा देती है। सिख समाज के लाडले योद्धा बॉर्डर पर शहीद हो रहे हैं। ये लाडले योद्धा आई.एस.आई. की गोली से शहीद हो रहे हैं। क्या हमें अपने जवानों की शहादत की कोई फिक्र नहीं है। इससे बड़ा और मजाक क्या हो सकता है कि जिनकी गोली से हमारे जवान शहीद हो रहे हैं हम उसी आई.एस.आई. की शह पर पंजाब में खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। खालिस्तान की मांग क्यों हो रही है इस पर बिट्टा ने कहा कि सभी कुछ चौधर की भूख के लिए हो रहा है। पहली बात पंजाब को बर्बाद करने वाला कोई एक राजनीतिक दल नहीं है। चौधर की भूख में पंजाब को बर्बाद करने से कोई भी सियासी दल पीछे नहीं है। सभी ने मिलजुल कर पंजाब को बर्बाद किया है। दूसरा झगड़ा फंड के लिए है। गुरु घरों में गोलक का झगड़ा है तो विदेशों में फंड इकट्ठा करने के लिए पंजाब में खालिस्तान की बार-बार मांग उठाई जाती है। 

खालिस्तान के संबंध में प्रचारित किए जा रहे रेफरेंडम 2020 की भारतीय सिखों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि सिखों का भविष्य सिर्फ भारत में ही सुरक्षित है और खालिस्तान की मांग उनके लिए आत्मघाती है। सिख ब्रदरहुड इंटरनैशनल ने खालिस्तान के संबंध में प्रचारित किए जा रहे रेफरेंडम 2020 की तीखी आलोचना की है। साथ ही कहा है कि आई.एस.आई. के एजेंट और उनके द्वारा समर्थित सिखों का एक समूह इस राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र को पाकिस्तानी एस्टैब्लिशमैंट (सेना) के इशारों पर भड़का रहे हैं। सिख ब्रदरहुड इंटरनैशनल के अध्यक्ष बक्शी परमजीत सिंह ने इसके लिए एक वेबसाइट भी तैयार की है, जिसमें खालिस्तानियों को आई.एस.आई. एजेंटों के साथ देखा जा सकता है। बक्शी ने कहा कि वह इस मसले को हवा देने के लिए 12 अगस्त को कनाडा, इंग्लैंड आदि देशों में प्रदर्शन भी करने वाले हैं। 

उन्होंने कहा कि इस षड्यंत्र (रेफरेंडम 2020) के मुख्य कर्ताधर्ता आई.एस.आई. समर्थित वे सिख हैं, जिन्होंने 1984 में विभिन्न देशों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजनीतिक शरण ली थी। लिहाजा, उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे इस मसले को तुरंत संबंधित सरकारों के समक्ष उठाए। साथ ही उन्हें चेतावनी दें कि अगर उनकी जमीन पर भारत के खिलाफ ऐसे ही गतिविधियां चलती रहीं तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने पर सऊदी अरब कनाडा के राजदूत को वापस भेज सकता है तो भारत इनके खिलाफ कड़े कदम क्यों नहीं उठा सकता? भारत सरकार को संबंधित सरकारों से मांग करनी चाहिए कि वे खालिस्तानी षड्यंत्रकारियों के फर्जी दस्तावेजों की जांच करें और उन्हें अपने देश से बाहर करें। बक्शी ने इस बाबत पंजाब सरकार से भी गुहार लगाई है कि वह राज्य में चल रहे देश विरोधी गतिविधियों को सख्ती से कुचल दे। वर्ष 1947 में हमारे नेतृत्व ने स्वेच्छा से भारत में रहना मंजूर किया, उन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं था। उन्हें पता था कि सिख धर्म और हिन्दुत्व एक-दूसरे के पूरक हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी हिन्दू परिवार अपने सबसे बड़े लड़के को सिख धर्म को समर्पित करते आए हैं। आज भी हिन्दू गुरु ग्रंथ साहिब का उतना ही सम्मान करते हैं जितना सिख करते हैं।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के विश्व स्तर पर बढ़ते प्रभाव और विकास मार्ग पर बढ़ते कदमों को रोकने हेतु पाकिस्तान सहित कई अन्य देश हैं जो भारत की अखण्डता को क्षेत्र, भाषा और धर्म के नाम पर चुनौती देने के प्रयास पिछले कुछ दशकों से लगातार करते चले आ रहे हैं। भारत सैनिक दृष्टि और आर्थिक दृष्टि से विश्व के पहले पांच देशों में आता है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता के परिणामस्वरूप भारत में लोकतंत्र की जड़़े भी मजबूत होती जा रही हैं। उपरोक्त तथ्यों के कारण भारत की पहचान विश्व स्तर पर मजबूत होती जा रही है। भारत की मजबूत होती पहचान, साख व छवि को कमजोर करने हेतु ही भारत विरोधी ताकते देश की अखण्डता को चुनौती दे भारत की छवि को खराब करना चाहती है। 

भारत सरकार को भारत विरोधी गतिविधियां चाहे वह विदेश मे हो या देश के भीतर हो उनको गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। कश्मीर घाटी रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या के साथ-साथ रेफरेंडम 2020 के मुद्दे को भारत सरकार को गंभीरता से लेकर राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए। अंत में सैन्य विकल्प तो देश के पास है ही। उपरोक्त सभी मामलों में दिखाई थोड़ी सी उदासीनता भी भविष्य में मुश्किल का कारण बन सकती है, इसलिए गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।  

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