केंद्र सरकार किसान विरोधी खेती कानून बिना किसी देरी के वापिस ले: तृप्त बाजवा और सरकारिया

-पंजाब के कैबिनेट मंत्री तृप्त बाजवा और सरकारिया किसानों के हक में दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने में हुए शामिल
-जब किसनों ने खेती सुधार कानूनों की माँग ही नहीं की तो क्यों थोपे जा रहे हैं काले कानून
-मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा पहले ही रद्द कर चुकी है तीनों केंद्रीय खेती कानून

दिल्ली/चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): पंजाब के दो कैबिनेट मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा और सुखबिन्दर सिंह सरकारिया आज जंतर मंतर पर पंजाब के कांग्रेसी संासदों द्वारा किसानों के हक में दिए जा रहे धरने में शामिल हुए। इस मौके पर तृप्त बाजवा और सरकारिया ने साझा बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को किसानों पर थोपे गए तीनों काले कानून तुरंत वापिस लेने चाहिए।

दोनों कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि दो महीने से देशभर के लाखों किसान दिल्ली की सरहद पर कड़ाके की ठंड में संघर्ष कर रहे हैं। परन्तु केंद्र सरकार किसान विरोधी कानून रद्द करने की बजाय किसान संघर्ष को पूरी तरह नष्ट करने के लिए फूट डालो और टाल मटोल की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक 100 से अधिक किसानों की इस संघर्ष में जान जा चुकी है, इस सबके बावजूद भी केंद्र सरकार अभी भी किसानों से संबंधित मामले का हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही, बल्कि उल्टा किसानों को डराने धमकाने के लिए ई.डी के नोटिस भेज रही है।

बाजवा और सरकारिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की है कि जि़द्द छोडक़र ख़ुद पहल करते हुए तीनों किसान विरोधी खेती कानून रद्द करने का ऐलान करें। दोनों मंत्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर से न किसी किसान ने और न ही किसी राज्य सरकार ने ये थोपे गए खेती सुधारों की माँग की थी, जिस कारण पहले ही पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया और सर्वसम्मति से पूरे सदन ने ये कानून रद्द कर दिए हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि केंद्र सरकार को ये काले कानून लागू करवाने के लिए बड़े औद्योगिक घरानों के दबाव से बाहर निकलकर देश के अन्नदाता के आगे सिर झुकाते हुए तुरंत ये कानून रद्द कर देने चाहिएं।
इस मौके पर पंजाब के दोनों मंत्रियों ने संघर्ष कर रहे किसानों और किसान संगठनों को बधाई भी दी कि लाखों लोगों के जलसे के बावजूद इतने बड़े आंदोलन में सभी ने शान्ति बनाई हुई है।