कैप्टन भाजपा का एजैंट, बीजेपी में हो जाना चाहिए शामिल : चड्ढा

चंडीगढ़ (विज): आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पंजाब सह-प्रभारी राघव चड्ढा ने आज एक प्रैस कांफ्रैंस में कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी के एजैंट की तरह बर्ताव कर रहे हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।

चड्ढा ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा की धुन पर ही नाच रहे हैं और किसानों के आंदोलन को भटकाना चाह रहे हैं।

मुख्यमंत्री के पुत्र मोह पर बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने पुत्र मोह में अंधे हो गए हैं और अपने बेटे और परिवार को ईडी, सीबीआई और अन्य जांच एजैंसियों के चंगुल से बचाना चाहते हैं।

कैप्टन की उदासीनता पर बात करते उन्होंने कहा कि ये ध्यान देने योग्य बात है कि जब जुलाई-अगस्त 2019 में जब इन कानूनों के ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए बैठकें बुलाई गईं तो कैप्टन साहब भी इन बैठकों में शामिल थे। कांग्रेस पार्टी इन बैठकों का हिस्सा रही है और उन्होंने इन कानूनों को लागू करने में अपनी सहमति भी दी है। फरवरी 2020 में व्यापक विरोध के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वो इन कानूनों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे लेकिन अब तक उन्होंने ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई।
चड्ढा ने कैप्टन का प्रधानमंत्री मोदी के साथ रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि कैप्टन पीएम मोदी के काफी करीबी हैं उसके बावजूद उन्होंने मोदी से इन कानूनों को वापस करने पर चर्चा करने के लिए कोई वक्त नहीं मांगा। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा, मैं पूछना चाहता हूं कि क्यों कैप्टन साहब ने प्रधानमंत्री से अच्छे रिश्ते होने के बावजूद उनसे मिलने का समय नहीं मांगा?
नवंबर 2020 से चल रहे किसान आंदोलन पर बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि 26 नवंबर को जब किसानों ने घोषणा की कि वो दिल्ली की तरफ मार्च करेंगे तो भी कैप्टन साहब ने कोई ठोस फैसला नहीं किया। वो एक बार भी अपने महल से निकल कर किसानों से नहीं मिले जो खुले आसमान में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। अगर वो किसानों के साथ आए होते तो कोई भी किसानों पर आंसु गैस के गोले, पानी की बौछार या लाठी चार्ज करने की हिम्मत नहीं करता। दिल्ली आने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास गृह मंत्री अमित शाह जी से मिलने का समय होता है लेकिन उन किसानों से मिलने का समय नहीं है जो कुछ किलोमीटर की दूरी पर बैठकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।