कैप्टन की मोदी सरकार से अपील, बाढ़ प्रभावित राज्यों की सूची में पंजाब को भी शामिल करें

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज)- पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित अंतर मंत्रालय केन्द्रीय टीम पंजाब को भी उन बाढ़ प्रभावित राज्यों में तत्काल शामिल करे जिनका उसे बाढ़ की स्थिति का मौके पर आकलन करना है। केन्द्र सरकार ने ग्यारह प्रदेशों की सूची तैयार की है जहां केन्द्रीय टीम (आईएमसीटी)बाढ़ से हुये नुकसान का जायजा लेगी लेकिन उस सूची में पंजाब का कहीं जिक्र नहीं किया गया है जबकि पंजाब में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। केन्द्रीय टीम को मेघालय , असम , त्रिपुरा , उत्तराखंड ,हिमाचल प्रदेश ,गुजरात , महाराष्ट्र ,कर्नाटक और केरल का दौरा करने के लिये कहा गया है । यही कमेटी बाढ़ प्रभावित राज्यों को सहायता मुहैया कराने के लिये अंतिम सिफारिश करेगी। 


कैप्टन सिंह ने ट्वीट किया,‘‘विभिन्न राज्यों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करने के लिए गठित की गई कमेटी द्वारा राज्यों के किये जाने वाले दौरों की सूची से पंजाब को बाहर रखने पर हैरानी हुई है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी, आपसे अपील करता हूँ कि आप पंजाब में बाढ़ से हुए भारी नुकसान का अनुमान लगाने के लिए केंद्रीय टीम को राज्य का दौरा करने के लिए हिदायत जारी करें।’’

गत 19 अगस्त को एक उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक के दौरान लिए फ़ैसले के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम का गठन किया गया । इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से जायज़ा लेने के लिए प्रभावित राज्यों को ज्ञापन सौंपने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती थी जबकि इस कमेटी ने यह प्रथा अब ख़त्म कर दी है। कैप्टन सिंह ने बताया कि उन्होंने पंजाब में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर 1000 करोड़ रुपए के विशेष बाढ़ राहत पैकेज की माँग की है। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक राज्य को बाढ़ से लगभग 1700 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने ख़ुद भी प्रभावित इलाकों का दौरा करके खड़ी फसलों, घरों, सरकारी संपत्तियों और पशुधन को पहुँचे नुकसान की ज़मीनी स्थिति का जायज़ा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की कि मौजूदा फ़सलीय सीजन के दौरान बाढ़ प्रभावित गाँवों के किसानों द्वारा बैंकों /वित्तीय संस्थाओं से लिए फ़सलीय ऋणों को माफ करने के लिए वह सम्बन्धित अथॉरिटी को हिदायतें जारी करें।