कैप्टन ने धान की चरणबद्ध खरीद यकीनी बनाने के लिए मिलों के स्थानों को मंडी यार्ड के तौर पर बरतने की दी इजाज़त

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): कोविड -19 के दौरान आगामी खरीफ की फ़सल के सीजन के मौके पर धान की निर्विघ्न खरीद को यकीनी बनाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को कस्टम मिलिंग नीति 2020 -21 में कई संशोधनों का ऐलान किया जिनमें मिलों के स्थानों का मंडी यार्डों के तौर पर इस्तेमाल किया जाना भी शामिल है। मुख्यमंत्री की तरफ से इस मकसद के लिए कस्टम मिलिंग नीति 2020-21 के क्लॉज 12 (जे) को हटा देने को मंज़ूरी दे दी गई है। इस क्लॉज का संबंध उन मिल मालिकों के साथ है जोकि आढ़तीएं भी हैं और मौजूदा नियमों के अंतर्गत जिनको उस एजेंसी की तरफ अलाट करने की इजाज़त नहीं थी जिसके लिए वह आढ़तियों का काम करते थे।


एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस कदम से चरणबद्ध खरीद यकीनी बनेगी जिससे महामारी के समय के मौके पर मंडियों में भीड़-भाड़ से छुटकारा मिलेगा। यह फ़ैसला मुख्यमंत्री की तरफ से पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन की तरफ से उठाये गए मुद्दों पर गहराई के साथ विचार करके खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग के प्रस्तावों के आधार पर किया गया है। मुख्यमंत्री की तरफ से खरीफ की फ़सल 2020-21 की कस्टम मिलिंग नीति और उपबंधों में कुछ और संशोधन करने को मंज़ूरी दे दी गई है जिस्रमें बैंक गारंटी क्लॉज की बहाली, आर.ओ. की अधिकतम बाँटे जाने वाली इजाज़त योग्य संख्या और मौजूदा मिलों की बिक्री शामिल हैं।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि साल 2020 -21 की कस्टम मिलिंग नीति में शामिल बैंक गारंटी क्लॉज की बहाली को बीते वर्ष के उपबंधों की तुलना में हरी झंडी दिए जाने से बैंकों में जमा करवाई जाने वाली रकम की फीसद मौजूदा 10 प्रतिशत से कम करके 5 प्रतिशत तक आ जाएगी। इससे राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा क्योंकि बैंक गारंटी बराबर के पैमाने के तौर पर काम करेगी। संशोधित नियमों के अंतर्गत मिल मालिक को अब अपने स्थान में धान का वास्तविक भंडारण करने से सम्बन्धित एजेंसी को बैंक गारंटी जमा करवानी पड़ेगी जोकि 5000 मीट्रिक टन से अधिक हद तक बाँटे जाने वाले मुफ़्त धान को हासिल करने की कीमत के 5 प्रतिशत के बराबर होगी। यह बैंक गारंटी एफ.सी.आई. को ज़रुरी चावल उपलब्ध करवा दिए जाने के बाद छोड़ दी जायेगी।


राइस मिलर्स एसोसिएशन की माँग को मंज़ूर करते हुए मुख्यमंत्री ने कस्टम मिलिंग नीति 2020 -21 के क्लॉज 10 (बी) (आई) (8) में संशोधन को भी मंज़ूरी दे दी है जो कि इस हद तक होगी कि स्वामित्व/सांझेदारी में 50 प्रतिशत से अधिक बदलाव होने की सूरत में इसको रजिस्ट्रेशन के पक्ष से एक नयी मिल समझा जायेगा और अधिकतम बाँटे जाने योग्य धान के ऐच्छिक हक में कोई कटौती नहीं होगी बशर्ते कि मौजूदा नीति के अनुसार नई मिल स्थापित करने के लिए सभी शर्तें पूरी की हों। प्रवक्ता ने आगे बताया कि इसके अलावा कस्टम मिलिंग नीति 2019 -20 में आर.ओ. स्कीम के अंतर्गत अधिकतम इजाज़त योग्य धान की बहाली कर दी गई है भाव 3000 मीट्रिक टन -1875 मीट्रिक टन, 3000 मीट्रिक टन से अधिक परन्तु 4000 मीट्रिक टन - 2500 मीट्रिक टन के बराबर हिस्से से कम, 4000 मीट्रिक टन से अधिक परन्तु 5000 मीट्रिक टन - 3750 मीट्रिक टन के बराबर हिस्से से कम, 5000 मीट्रिक टन से अधिक परन्तु 6000 मीट्रिक टन - 5000 मीट्रिक टन के बराबर हिस्से से कम और 6000 मीट्रिक टन  - 6250 मीट्रिक टन से अधिक।