कैप्टन व खट्टर की बैठक

12:58 PM Jul 14, 2019 |

बढ़ते नशे की समस्या को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से उनके कार्यालय में मुलाकात की जो करीब आधे घंटे तक चली। दोनों नेताओं ने युवाओं में व्याप्त नशे की समस्या को समाप्त करने और उनके उज्जवल भविष्य के लिए नशे के चंगुल से उन्हें मुक्त करवाने के लिए कड़े कदम उठाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लम्बे समय से चली आ रही इस समस्या से निपटने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करने हेतु पंजाब द्वारा 25 जुलाई, 2019 को यहां आयोजित होने वाली बैठक में शामिल होने की सहमति जताई। मनोहर लाल ने कैप्टन अमरेन्द्र सिंह को बताया कि हालांकि नशे की समस्या हरियाणा में उतनी चिंताजनक नहीं है जितनी की पंजाब में है, फिर भी वर्तमान राज्य सरकार ने इसकी रोकथाम और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए राज्य में 1000 योग केंद्र और व्यायामशालाएं स्थापित की गई हैं। सभी क्षेत्रों के लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिला मुख्यालयों पर नियमित तौर पर राहगिरी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की पहल पर अगस्त, 2018 नें नशे का प्रकोप, चुनौतियां एवं रणनीतियां विषय पर 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। 

पंजाब में बेशक नशे की समस्या हरियाणा से अधिक है लेकिन दिल्ली व राजस्थान के साथ लगते हरियाणा के क्षेत्र में अपराध बढ़ रहे हैं और अधिकतर अपराधों के पीछे नशे के तस्करों का ही हाथ होता है। इसलिए नशे की समस्या को गंभीरता से लेने में ही पंजाब व हरियाणा के हित सुरक्षित हैं।

पिछले दिनों देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी पंजाब व हरियाणा को बातचीत द्वारा पानी तथा अन्य समस्याओं को हल करने का सुझाव दिया था। सर्वोच्च न्यायालय का मशविरा राष्ट्रहित को देखते हुए ही दिया गया, लेकिन समस्या यह है कि देश की राजनीति में क्षेत्रवाद इतना हावी हो चुका है कि किसी भी प्रदेश का मुख्यमंत्री क्षेत्रीय हितों की अनदेखी करके कोई बड़ा फैसला देशहित में लेने की हिम्मत नहीं करता। अगर वह ऐसा करता है तो प्रदेश के विपक्षी दल इतना विरोध करते हैं कि उसकी कुर्सी ही खतरे में पड़ जाती है। लेकिन समय की मांग है कि आज देशहित को प्राथमिकता देते हुए तथा क्षेत्रीय राजनीति से ऊपर उठकर फैसले लिए जाएं। 

जन चाहे किसी भी प्रदेश का हो, है तो वह भारतीय और इसलिए प्रत्येक समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो उसका फैसला जनहित व देशहित को सम्मुख रखकर बातचीत द्वारा ही होना चाहिए। अगर ऐसा नहीें हो सकता तो फिर न्यायालय जो फैसला दे उसे सभी को स्वीकार कर लेना चाहिए। कै. अमरेन्द्र सिंह व मनोहर लाल खट्टर की बैठक सही दिशा में उठा एक सही कदम है। ऐसे सकारात्मक कदम भविष्य में उठाए जाएं इसी में दोनों प्रदेशों व देश की भलाई है।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।