Tuesday, January 22, 2019 02:28 AM

सुचारू बिल्डिंग न दे सकने वाले क्या देंगे सुचारू सुविधाएं : निर्मल सिंह  

अम्बाला (राजेन्द्र भारद्वाज) : हरियाणा के पूर्व मंत्री एवम हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्मल सिंह ने कहा कि अम्बाला में बना सिविल हस्पताल खुले तौर पर भ्रष्टाचार का जीता जगता सबूत बन चुका है। मात्र 15 मिनट की बारिश में अंबाला कैंट के नए नवेले नागरिक अस्पताल की पोल खुलती नजर आ रही है। गौरतलब है कि पूरे हरियाणा प्रदेश में सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र में बनवाये गए सिविल हॉस्पिटल पर झूठी वाहवाही लूटने वाले मंत्री का सिविल हॉस्पिटल पूरी तरह भ्रष्टाचार के मकड़ जाल में उलझा हुआ है। उन्होंने कहा कि बीते देर रात हुई मात्र 15 मिनट की बारिश के दौरान एमरजैंसी वार्ड की सीलिंग जगह जगह से उखड़कर गिरने लगी बल्कि हवा के कमजोर थपेड़ो से वार्ड के अंदर लगे खिड़कियों एवम दरवाजो के शीशे के कांच भी टूट गए बल्कि एमर्जेन्सी वार्ड के साथ लगी सीढिय़ों की स्टील की रेलिंग भी उखड़कर नीचे फर्श पर जा गिरी। अगर मौके पर कोई मरीज या उसका कोई परिजन होता तो कोई बड़ा हादसा भी घटित हो सकता था।  

निर्मल सिंह ने कहा कि यहां पर प्रश्न ये उठता है कि जब जनता की मेहनत के लाखों रूपये लुटा देने के बावजूद भी जब मंत्री हस्पताल का एक मजबूत ढांचा ही नहीं मुहैया करा पाए तो उस फाइव स्टार रूपी जर्जर ढांचे के नीचे सशक्त एवम व्यवस्थित स्वास्थ सेवायें कैसे उपलब्ध करा पाएंगे । सरकारी रिपोट्र्स के अनुसार जो बिल्डिंग कई लाखो रूपये में तैयार हुई है जरूरी एम.आर.आई मशीन का वजन सह सकने में सक्षम नहीं है आखिर वो कितने समय तक लोगो की उम्मीदों का बोझ ढो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस सारे घटनाक्रम का सबसे शर्मनाक पहलु ये है की इस हादसे के बाद खबर मिलते ही हस्पताल प्रशासन व स्वास्थ मंत्रालय इस सारे मामले की लीपापोती में जुट गए अब देखना ये है की विभिन महकमो के अधिकारियो की कार्येप्रणाली को लेकर अक्सर उन्हें सस्पेंड करने वाले मंत्री क्या अपना और अपने ही महकमे की जिम्मेदारी का नजला किस विभागीय अधिकारी पर गिराएगे? साथ ही क्या विपक्ष में रहते हुए अक्सर तत्कालीन मंत्रियो एवम सरकार का इस्तीफा मांगने वाले मंत्री इस मुद्दे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे?  

निर्मल सिंह ने हरियाणा की मौजूदा भाजपा सरकार से मांग करते हुए कहा कि वो इस सारे मामले की जाँच हाईकोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत जज या उनकी अध्यक्षता में गठित कमेटी से कराये और साथ ही जाँच के पूरी होने तक इस मामले में संलिप्त भ्रष्टाचार के स्तर को देखते हुए इसे सम्बंधित महकमे के मंत्री का नैतिक तौर पर इस्तीफा ले जिससे की वो होने वाली इस जाँच को प्रभावित न कर सके ।
 

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