केजरीवाल की राह पर कै. अमरेन्द्र सिंह

10:46 AM Feb 16, 2020 |

दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिली प्रचण्ड जीत से भारतीय जनता पार्टी को तो झटका लगा ही है, लेकिन पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस को भी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए शह मिल गई है। इस बात को आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के प्रधान भगवंत मान ने भी ब्यान देकर स्पष्ट कर दिया है। पंजाब में सिखों का वह वर्ग जो अकाली दल बादल और कांग्रेस से असंतुष्ट है उसके लिए आम आदमी पार्टी अब एक नया विकल्प आ गया है। इसी तरह पंजाबी हिन्दुओं का वह वर्ग जो संघ व भाजपा की विचारधारा से असहमति रखता है और मजबूरन कांग्रेस के साथ खड़ा है उसके पास भी आप एक नये विकल्प के रूप में सामने है। दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की प्रचण्ड जीत का मुख्य कारण जहां मुस्लिम व सिख मतदाता का समर्थन है उसी के साथ यह बात भी याद रखनी होगी कि मुस्लिम और सिख मतदाता से दो गुणा अधिक हिन्दू मतदाता ने अपना मत केजरीवाल को दिया है। हिन्दू, मुस्लिम और सिख मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग जो अन्य राजनीतिक दलों से असंतुष्ट है उसका समर्थन पाने की आशा आम आदमी पार्टी का नेतृत्व पंजाब में भी लगाए बैठा है।

पंजाब की राजनीति में आ रहे बदलाव को देखते व भांपते हुए ही मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने प्रदेश के जिलाधीशों व उच्चाधिकारियों की बैठक में दिल्ली में केजरीवाल द्वारा अपनाए माडल को पंजाब में अपनाने के आदेश दिए हैं। बिजली, पानी, शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने नागरिक सेवाओं को यकीनी बनाने के लिए सभी सेवा केंद्रों के कामकाज पर निगरानी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि लोगों के सभी बकाया आवेदनों को समय पर निपटाया जाए। प्रशासकीय सुधार विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव विनी महाजन अनुसार राज्य में 515 सेवा केंद्र चल रहे हैं। सभी जिलों में 26 लाख से ज्यादा आवेदन आए, जिनमें से 42261 अर्जियां ही लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने संपत्ति तबादले, जमीन के विभाजन और इंतकाल जैसे मामलों के फौरन निपटारे के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण कमेटी की हर महीने मीटिंग बुलाई जाए और निर्धारित समय पर रिपोर्ट भेजें। सीमांत क्षेत्रों, खासतौर पर तरनतारन जिले में 71.26 फीसद बिजली चोरी का गंभीर नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे हर साल सरकारी खजाने को बड़ा घाटा पड़ रहा है। इससे कड़ाई से निपटना होगा।

उन्होंने तरनतारन के डीसी को पुलिस व पावरकॉम को मिलकर रणनीति बनाने के लिए कहा। सीएम ने बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों के बढ़ रहे खतरे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में कई कीमती जानें गई हैं। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों से सुझाव भी मांगे। उपरोक्त के साथ-साथ कै. सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड से 721 करोड़ रुपए मांगे हंै ताकि उनके कर्जे माफ किए जा सकें। एक वरिष्ठ अधिकारी अनुसार मंडी बोर्ड को 721 करोड़ रुपये देने के लिए लिख दिया गया है। मंडी बोर्ड ने ही कर्ज माफी योजना द्वारा किसानों व खेतिहर मजदूरों को राहत देने के लिए पैसे का प्रबंध किया है। पहले भी जिन किसानों को 4800 करोड़ से ज्यादा की कर्ज माफी मिली है, उन्हें इसी फंड से पैसा दिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि 31 मार्च से पहले पहले यह राशि अदा कर दी जाएगी। गौरतलब है कि खेतीबाड़ी विभाग ने मंडी बोर्ड से जिस 721 करोड़ रुपये की मांग की है, उसमें से 520 करोड़ रुपये खेतिहर मजदूरों के कर्ज को माफ करने के लिए खर्च होंगे। 2.85 लाख उन खेतिहर मजदूरों का कर्ज माफ किया जाएगा, जिन्होंने सहकारी समितियों से 25 हजार तक का लोन लिया हुआ है, जबकि 201 करोड़ रुपये छोटे व सीमांत किसानों के कर्ज माफ करने पर खर्च किए जाएंगे। ये तीस हजार वे केस हैं, जो पिछले साल कर्ज माफी के दौरान छूट गए थे। नए सिरे से हुई पड़ताल के बाद सरकार ने अब इन किसानों के कर्ज को भी माफ करने का फैसला लिया है।

पंजाब विधानसभा चुनाव बेशक दो वर्ष बाद होने हैं लेकिन पंजाब कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई तथा पंजाब प्रशासन की कमजोरियों के कारण कै. अमरेन्द्र सिंह की छवि व साख कमजोर ही हुई है। कै. अमरेन्द्र सिंह के स्वास्थ्य और आयु को देखते हुए कांग्रेस के भीतर भी कै. अमरेन्द्र सिंह का विकल्प ढूंढा जा रहा है। कै. अमरेन्द्र सिंह उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर एक तरफ प्रशासन पर पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं तो दूसरी तरफ जन साधारण को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की आतंरिक लड़ाई के कारण शायद ही कै. अमरेन्द्र सिंह केजरीवाल की राह पर चलकर सफल हो सकें। केजरीवाल आप के सर्वेसर्वा हैं। कै. अमरेन्द्र सिंह पंजाब कांग्रेस में भी सर्वेसर्वा नहीं हैं। इस कारण आशंका है कि वह चाह कर भी वे परिणाम नहीं दे सकेंगे जो केजरीवाल ने दिल्ली में दिए हैं।

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।