Thursday, January 24, 2019 02:26 PM

नुकसान के बावजूद बस ऑपरेटर अपनी मांगों पर अडिग

ऊना (ममता भनोट) : पेट्रोल व डीजल के बढ़ते दाम के बाद बस किराए की वृद्धि को लेकर मंगलवार को भी निजी बसों की हड़ताल जारी रही। दूसरे दिन भी हड़ताल का खासा असर देखने को मिला। जिसके चलते जिला के ग्रामीण क्षेत्रों से अपने कामकाज के लिए रोजाना इन बसों में सफर करने वाले लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं लगातार दो दिनों तक बसें न चलने से निजी बस ऑपरेटर्स को भी 30 लाख रुपए का नुक्सान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

खासे नुक्सान के बाबजूद बस ऑपरेटर अपनी मांगों पर अडिग हैं। वहीं संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेश पराशर ने कहा कि सरकार की तरफ से अभी बस ऑपरेटर्स संघ को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। जिससे उनकी समस्याओं निकट भविष्य में कोई हल निकलता नजर आए। उनका कहना है कि डीजल समेत अन्य पहलुओं से भी बसों का संचालन अब काफी महंगा पड़ रहा है। डीजल के दाम तो लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन किराया बढ़ाने की तरफ सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। जिसके चलते निजी बस ऑपरेटर्स लगातार घाटा उठा रहे हैं। 

उनका कहना है कि डीजल के बढ़ते दामों के चलते अनिश्चिकाल के लिए स्ट्राईक शुरू की गई है। वर्ष 2013 में जब डीजल 46 रुपये लीटर था तो 30 फीसदी किराया में बढ़ा था, लेकिन आज डीजल के दाम 76 रुपये प्रति लीटर पहुंचने के बाद भी सरकार बस ऑपरेटर्स की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के परिवहन मंत्री व मुख्यमंत्री को इस समस्या बारे में अवगत करवाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

उन्होंने सरकार से मांग है कि डीजल केे 50 रुपये से ज्यादा रेट की बस ऑपरेटर्स को सब्सिडी दी जाए, ताकि हम किराए कि इन्हीं दरों पर जनता को बस सुविधा प्रदान कर सकें। पराशर ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को न माना तो निजी बस ऑपरेटर्स चक्का जाम और आमरण अनशन करने से ही पीछे नहीं हटेंगे। पराशर ने प्रदेश सरकार को चेताया कि मांगे पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखी जाएगी। 

वहीं मांगें पूरीद न होने की सूरत में आने वाले दिनों में आंदोलन को ओर तेज किया जाएगा। यूनियन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को बस स्टैंड में प्रदेशाध्यक्ष की अगुवाई में केंद्र और प्रदेश सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष व्यक्त किया। हड़ताल के दूसरे दिन बस ऑपरेटर्स यूनियन से पवन ठाकुर, अवतार ढिल्लों, लक्की, दिनेश सैणी, मोनू मनकोटिया, नरेश कुमार, सुखदेव शर्मा, संजीव रायजादा, नरेंद्र शर्मा, नरेश कुमार, राजीव शर्मा, पंकज दत्ता, राम किशन, श्याम लाल, अश्वनी सैणी, संजीव रायजादा, नरेंद्र कुमार व अन्य बस ऑपरेटर्स मौजूद रहे।  

निजी बसों की हड़तल से आम जनजीवन भी काफी प्रभावित हुआ है। रोजाना हजारों की संख्या में निजी बसों में सफर करने वाले यात्री सरकारी बसों या फिर खुद वाहनों से अपने कार्यस्थल तक पहुंचे। कई स्थानों पर लोग अन्य लोगों से लिफ्ट मांग कर गंतव्यों की तरफ जाते दिखे। 
 

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