अंधविश्वास

बटाला के गांव कालानंगल में एक महिला तांत्रिक के साथ मिलकर आरोपियों ने पड़ोस की गर्भवती और उसके गर्भस्थ शिशु की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपियों ने एक तांत्रिक महिला के कहने पर यह जघन्य अपराध किया। गर्भवती का गला घोंटने के बाद आरोपियों ने सर्जिकल ब्लेड से उसका पेट चीर डाला। प्रैस कांफ्रैंस में एस.पी. (डी.) कुलवंत सिंह हीर ने बताया कि गांव कालानंगल के रहने वाले बलविंदर सिंह उर्फ बिंदर ने 29 अप्रैल को डी.एस.पी. फतेहगढ़ चूडिय़ां बलबीर सिंह से मिलकर शिकायत दी थी कि उसकी 28 साल की पत्नी जसबीर कौर जो 7 महीने की गर्भवती है, वह 27 अप्रैल को कहीं चली गई है और मिल नहीं रही। बलविंदर सिंह ने संदेह जताया था कि उसकी पत्नी जसबीर कौर गांव के रहने वाले पूर्ण सिंह की बहू रविंदर कौर के साथ आखिरी बार गांव में देखी गई थी। एस.पी. ने बताया कि सूचना मिलने पर डी.एस.पी. बलबीर सिंह की अगुवाई में पुलिस पार्टी गांव कालानंगल गई और पंचायत को साथ लेकर पूर्ण सिंह के घर पहुंची। पुलिस ने जब उनसे पूछा तो पूर्ण सिंह और उसका परिवार जसबीर कौर के बारे कुछ भी जानकारी होने से इंकार करता रहा। पूर्ण सिंह की पत्नी जोगिंदर कौर ने भी कहा कि उसे कुछ नहीं पता है। पुलिस ने घर की तलाशी लेने पर जब पेटी खुलवाई तो उसमें से जसबीर कौर की लाश बरामद हुई। आरोपी और पीडि़त परिवार गरीब परिवारों से हैं। मृतका की हाल ही में शादी हुई थी और उसके गर्भ में पहला बच्चा था। पूछताछ करने पर आरोपी पूर्ण और उसकी पत्नी जोगिंदर कौर ने बताया कि उनके बेटे गुरप्रीत सिंह की शादी रविंदर कौर के साथ हुई थी। शादी के 5 साल बाद भी उनकी बहू रविंदर कौर मां नहीं बन पाई थी। औलाद हासिल करने के लिए वह पास के गांव हसनपुर कलां में दीशो उर्फ देवा पत्नी सतनाम सिंह के पास पहुंचे। देवा ने औलाद प्राप्ति के लिए उन्हें यह उपाय बताया कि वह किसी 7-8 महीने की गर्भवती महिला का इंतजाम करे और उसका पेट चीर कर उसमें से बच्चा निकाल कर रख लें और गांव में यह प्रचारित कर दें कि उनकी बहू ने बच्चे को जन्म दिया है। पुलिस ने हत्या के आरोप में पूर्ण सिंह, उसकी पत्नी जोगिंदर कौर, बहू रविंदर कौर और तांत्रिक दीशो उर्फ देवा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसकी बेटी नीतू, अमन कौर और राजिंदर कौर पुलिस के हाथ नहीं आई।

कुछ समय पूर्व ऐसी ही एक घटना सामने आई थी जिस अनुसार तांत्रिक के कहने पर एक बालक की बलि दे दी गई थी। गरीबी और अनपढ़ता के कारण लोग तांत्रिकों के चक्कर में आकर ऐसा कर गुजरते हैं जो एक जघन्य अपराध होता है और जिससे मानवता भी शर्मसार होती है।

तांत्रिकों के साथ-साथ डेरों के संचालकों के चक्कर में आकर भी कई घर बर्बाद हो चुके हैं। डेरा संचालकों के प्रति अंधविश्वास होने के कारण कई लड़कियां और महिलाएं अपनी इज्जत खो चुकी हैं। कुछ समाज के डर से चुप रहती हैं कुछ पुलिस व न्यायपालिका के चक्कर से बचने के लिए चुप रहती हैं। कुछ ही हौसला कर चुनौती का सामना करती हैं और सत्य को सार्वजनिक करने में सफल भी होती हैं। ऐसी महिलाएं और लड़कियों की आप बीती से प्रेरणा लेकर लोगों को ऐसे असामाजिक तत्वों के विरुद्ध एक अभियान चलाना होगा। कानून तो तभी हस्तक्षेप करेगा जब घटना घटेगी। समाज अंधविश्वास के विरुद्ध अभियान चलाएगा तो शायद घटनाएं होनी बंद हो जाएं। अपराधियों को बिना विलम्ब ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिसको देख कर अन्य कोई ऐसा जघन्य व अमानवीय अपराध करने की हिम्मत ही न करे।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।