Friday, May 24, 2019 12:30 AM

पादरी से प्राप्त हुआ काला धन

पंजाब पुलिस ने खन्ना में बड़े रैकेट का पर्दाफाश कर 9.66 करोड़ रुपये ले जा रहे छह लोगों को पकड़ा आरोपितों में एक जालंधर का पादरी एंथोनी और नवी मुंबई का एक दंपती भी शामिल है। बरामद राशि आयकर विभाग व ईडी के हवाले कर दी गई है। आरोपित पादरी एंथोनी नन के साथ दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे डॉयसिस ऑफ जालंधर के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल का करीबी है। उधर, पंजाब क्रिश्चियन लीडर्स काउंसिल के प्रधान लाल चंद ने दावा किया कि पुलिस ने 9.66 करोड़ नहीं 15 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। यह राशि शिक्षण संस्थानों से हुई आय की है। पुलिस ने नाके से नहीं बल्कि पादरी एंथोनी के घर पर रेड कर रुपये बरामद किए हैं। अब उन्हें बिना वजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। एसएसपी ध्रुव दाहिया ने प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर डीएसपी (आइ) हंसराज और उनकी टीम दोराहा के पास नाका लगाकर चेकिंग कर रही थी। इस दौरान पुलिस ने लुधियाना की तरफ से आ रही एक फोर्ड इको स्पोर्ट कार, एक इनोवा और एक मारुति ब्रेजा कार को रोका। तलाशी के दौरान इन कारों में से हवाला की 9 करोड़ 66 लाख रुपये की भारतीय करंसी बरामद हुई। इसके बाद कारों मे मौजूद छह लोगों को हिरासत में लिया गया। देर शाम सभी को छोड़ दिया गया। एसएसपी ने बताया कि बरामद की गई राशि आयकर विभाग और ईडी के अधिकारियों को सौंप दी गई है। 

पादरी के घर से या नाके से कितने करोड़ रुपए मिले इसको लेकर उठा विवाद तो छानबीन के बाद समाप्त हो जाएगा लेकिन सबसे गंभीर मसला तो यह है कि ईसाई प्रचारक धन राशि से गरीब हिन्दुओं का जो धर्मांतरण कराते थे और आज भी करा रहे हैं। उस पर रोकथाम कैसे लगेगी? एक पादरी से जब करोड़ों रुपए मिल रहे हैं तो फिर देश के बड़े शहरों और बड़ी चर्च के पादरियों के पास कितना काला या सफेद धन होगा इसका तो अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा। आज से करीब दो दशक पहले वेटिकन सिटी से जब पोप भारत गए थे तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत के ईसाइयों की संख्या बढ़ाने की बात कही थी।

पोप के दिशा निर्देश के अन्तर्गत ही भारत में धन के बल पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। विश्व में ईसाइयत और इस्लाम में सदियों से जंग जारी है लेकिन दोनों हिन्दुत्व को कमजोर करने  के लिए भी सक्रिय हैं। इसलिए भारत में ईसाइयत व इस्लाम को फैलाने के लिए विदेशों से करोड़ों रुपया हवाला के रास्ते आता है और उसके द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर हिन्दुओं का धर्मांतरण कराया जाता है। केन्द्र सरकार ने गत समय में विदेशों से गैर सरकारी संगठनों से मिलने वाली राशि को  लोकर कानून में बदलाव कर सख्त किए थे इसके बावजूद पादरी से करोड़ों रुपए मिले हैं तो इसका मतलब यह भी है कि धर्मांतरण का घातक खेल अभी जारी है। सरकार को और सतर्क हो कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार ने अगर धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर कमजोरी या उदासीनता दिखाई तो भविष्य में इस घातक खेल को रोक पाना और कठिन हो जाएगा। सरकार का साथ समाजसेवी तभी धर्मांतरण की समस्या का समाधान हो सकेगा इसलिए सरकारी और सामाजिक दोनों स्तर पर मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है तभी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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