शत्रु-कीर्ति का टिकट काटेगी भाजपा, पटना साहिब से चुनाव में उतर सकते हैं मोदी 

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : भारतीय जनता पार्टी बिहार की पटना साहिब सीट से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट अगले लाकसभा चुनाव में काट देगी। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कई दफा खुले तौर पर आलोचना कर चुके सिन्हा की जगह इस सीट से 2019 में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी उम्मीदवार हो सकते हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा ये साफ कर चुकी है कि शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट नहीं दिया जाएगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा बिहार की पटना साहिब सीट से सांसद हैं। वो 2014 में बड़े अंतर से यहां से जीते थे, इससे पहले 2009 में भी वो यहां से सांसद थे। शत्रुघ्न सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इस सीट पर सिन्हा का अच्छा प्रभाव माना जाता है लेकिन लेकिन इस बार भाजप सुशील कुमार मोदी को यहां से टिकट दे सकती है।

2014 में सरकार बनने के बाद ही शत्रुघ्न सिन्हा की नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ शत्रुघ्न सिन्हा की नहीं बनी है। सरकार बनने के बाद माना जा रहा था कि उनको मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी क्योंकि वो वााजपेयी सरकार में मंत्री रहे थे। मोदी मंत्रिमंडल में उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं मिली। बीते कुछ समय से मोदी और शाह की सिन्हा खुलेतौर पर आलोचना करते दिखते हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा राष्ट्रीय जनता दल के कई कार्यकर्मों में दिखते रहे हैं। आम आदमी पार्टी के मंचों पर भी वो कई बार दिखे हैं। कई दफा वो इशारा कर चुके हैं कि चुनाव जरूर लड़ेंगे। ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि 2019 में वो पटना साहिब से राजद, आप फिर या निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में दिखें। ऐसी स्थिति में उनकी दावेदारी एक बार फिर मजबूत हो सकती है। वैसे सिंहा पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं। 

सिंहा के अलावा मिथलांचल के कद्दावर नेता कीर्ति झा आजाद भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते रहे हैं। वे फिलहाल भाजपा की टिकट पर दरभंगा के सांसद हैं। उनके स्थान पर जनता दल यू के संजय झा को मैदान में उतारे जाने की खबर है लेकिन वहां भी यह सीट भाजपा-जेडीयू के लिए आसान नहीं होगा। कीर्ति झा दरभंगा के लिए लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। उनके पक्ष में यदि गोलबंदी हुई तो इस बार वे संजय झा को मात दे सकते हैं। वैसे चुनाव लडऩे के मूड में वे भी हैं। संभवत: वे दरभंगा से ही चुनाव लड़ें और कांग्रेस, आरजेडी एवं वामपंथी गठबंधन उन्हें सहयोग करे। 
 

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