भाजपा मंत्री भंवर में

हिमाचल प्रदेश सरकार के विद्युत मंत्री अनिल शर्मा नैतिकता की दृष्टि से राजनीतिक भंवर में हैं, उनके पिता सुखराम शर्मा कांग्रेस में अपने पौत्र तथा अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे और इसे घर वापसी करार दिया था। अनिल शर्मा के बेटे आश्रय को कांग्रेस ने मंडी लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार के रूप में उतारा है, मंडी से अनिल शर्मा स्वयं विधायक हैं।

मंडी विधानसभा क्षेत्र के अलावा 16 अन्य विधानसभा क्षेत्र मंडी संसदीय क्षेत्र में पड़ते हैं। मंडी लोकसभा सीट के अंतर्गत एक विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक होने की वजह से अनिल शर्मा से भाजपा उम्मीदवार रामस्वरूप शर्मा के समर्थन में और कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किए जाने की उम्मीद की जा रही थी।

अनिल शर्मा ने कहा, ''मैंने पिता सुखराम और बेटे को 25 मार्च को कांग्रेस में फिर से शामिल होने के बाद भाजपा नेतृत्व को पहले ही बता दिया था कि यदि कांग्रेस आश्रय को टिकट देती है तो मैं उनके खिलाफ प्रचार नहीं करूंगा।''

अनिल शर्मा ने कहा, 'मैं मंडी के अलावा अन्य सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने के लिए तैयार हूं।' शर्मा 1993 और 2012 में राज्य में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकारों के दौरान मंत्री थे लेकिन अक्तूबर 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले वह अपने पिता के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। आश्रय मंडी से भाजपा का उम्मीदवार बनना चाहते थे लेकिन भाजपा ने मौजूदा सांसद रामस्वरूप को टिकट दे दिया जिसके बाद आश्रय अपने दादा के साथ फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ''अनिल भाजपा के सदस्य हैं तथा उन्हें पार्टी के लिए प्रचार करना होगा। देखना यह है कि उन्हें प्रचार पर कहां भेजा जाता है।'' शिमला के नजदीक एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पंडित सुखराम ने जो सपना देखा है तथा उसे पोते के लिए साकार करने के लिए किया है। उन्हें सोचना चाहिए था कि उनका बेटा मण्डी से उस पार्टी का विधायक है,जिसकी प्रदेश में सरकार है तथा सरकार में मंत्री है। सुखराम ने अपने बेटे तथा आश्रय ने अपने पिता को बहुत संकट में डाला है। इसलिए उनका समाधान भी परिवार में ही निकलना चाहिए। भाजपा अनिल शर्मा की सारी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि अनिल शर्मा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े हैं तथा जीते हैं तथा सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में शर्मा को प्रचार करने के लिए कहा गया है। अनिल शर्मा ने कहा है कि वह मण्डी में प्रचार नहीं करेंगे। सोचेंगे ऐसे में देखेंगे कि उन्हें कहां प्रचार के लिए भेजा जाए। प्रचार तो उन्हें पार्टी का करना पड़ेगा, क्योंकि वह भाजपा के सदस्य हैं। लेकिन उसके बावजूद बाकी हमने उनके विवेक पर छोड़ा है।

सत्ता सुख पाने के लिए कोई पहली बार धर्म संकट पैदा नहीं हुआ है। अतीत में जायें तो पायेंगे कि चुनावों में एक परिवार के विभिन्न सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ते मिल जायेंगे। ऐसे उदाहरण प्रदेश और देश स्तर पर मिल जाते हैं लेकिन मंत्री अनिल शर्मा की स्थिति कुछ अलग है, क्योंकि उनकी पार्टी के विरोध में उनके पिता व बेटा दोनों मैदान में हैं। जिस पार्टी ने उन्हें मंत्री पद दिया है। उसका उन पर पूरा हक है और इसी हक के साथ मुख्यमंत्री जयरम ठाकुर मंत्री अनिल शर्मा से पार्टी उम्मीदवार रामस्वरूप शर्मा के लिए प्रचार करने को कह रहे हैं। अनिल शर्मा केवल राजनीतिक भंवर में ही नहीं फंसे बल्कि धर्म संकट का भी सामना उन्हें करना पड़ रहा है। पुत्र चुनाव हारता है तो परिवार उनकी भूमिका को लेकर प्रश्न चिह्न लगायेगा अगर जीता तो वह पार्टी के कटघरे में खड़े दिखाई देंगे।

उपरोक्त स्थिति से बचने के लिये मंत्री अनिल शर्मा को आत्मा की आवाज सुन कर तत्काल निर्णय लेकर एक नाव का सवार बन जाना चाहिए। जिसके पांव दो नावों में होते हैं उसी के डूबने की आशंका भी अधिक होती है। अंतिम निर्णय तो अनिल शर्मा को ही लेना होगा। जितनी जल्दी लेंगे उतनी जल्दी राजनीतिक भंवर से बाहर निकल आएंगे।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।