भाजपा जमीनी विवाद : पार्टी कार्यालय की जमीन को लेकर भी दो गुटों में बटी रही भाजपा

सोलन (प्रताप भारद्वाज): सोलन जिला में इन दिनों भाजपा के पार्टी कार्यालय के जमीनी विवाद को लेकर भाजपा दो गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है,एक धड़े में जहां जमीनी विवाद के मुख्य आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है,वहीं एक ओर दूसरे गुट द्वारा उसी आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है। जहां तो इतने बड़े मुद्दे पर भाजपा को एक साथ होने की जरूरत थी कहां 90 लाख की जमीन को लेकर पार्टी में ही गुटबाज़ी नजर आने लगीं है। फिलहाल जमीनी विवाद में दीनानाथ जो कि मुख्य आरोपी है उससे पुलिस जांच कर रही है,वहीं पार्टी द्वारा बनाये गए दूसरे आरोपी पूर्व पार्षद को भी अब सुप्रीम कोर्ट से 15 दिन के अंदर पुलिस द्वारा की जा रही जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं है कि भाजपा पहली बार गुटों में बटी है।

इससे पहले जब से डॉ राजीव बिन्दल जो कि वर्तमान में नाहन से विधायक है उनके सोलन से जाने के बाद से ही भाजपा में गुटबाजी नजर आने लगी थी। लेकिन उनके अध्यक्ष बनने के बाद सोलन में चल रही ये गुटबाजी खत्म होते हुए नजर आ रही थी,लेकिन जब से डॉ राजीव बिन्दल ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है तब से ही भाजपा में फिर से गुटबाजिया नजर आने लगी है,और ये गुटबाजी अब भाजपा के पार्टी कार्यालय की जमीन विवाद को लेकर भी देखने को मिलने लगी है। जहां एक ओर भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने की बात सबके सामने रखती है,वहीं उसी पार्टी के सोलन कुनबे में गुटबाजी दिखना वो भी ऐसे समय मे जहां पार्टी को एकजुट होने की जरूरत थी,कहीं न कहीं पार्टी के वीक पॉइंट को दर्शाती है। बता दें कि भाजपा द्वारा वर्ष 2016 पार्टी कार्यालय के लिए तत्कालीन जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक खरीद कमेटी का गठन किया था। पार्टी द्वारा उस जमीन की बात की गई और सौदा तय किया गया, इसके उपरांत ही पार्टी ने जमीन मालिक के खाते में अक्तूबर 2016 में 35 लाख रुपए व मार्च 2017 में 50 लाख रुपए की पेमेंट का भुगतान किया था।

मार्च 2017 में ही पार्टी व जमीन मालिक के बीच में एक एग्रीमेंट साइन हुआ। लेकिन दो सालों के बाद अब जब जमीन मालिक ने वो जमीन किसी और को बेच दी है,और जबसे ये मामला सबके सामने आया है तब से सोलन भाजपा में खलबली मची हुई है। वहीं सोलन में भाजपा पार्टी द्वारा बनाये गए आरोपी पूर्व पार्षद को अब सुप्रीम कोर्ट से 15 दिन के अंदर पुलिस द्वारा की जा रही जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए है। वहीं पूर्व पार्षद ने प्रेस वार्ता कर सोलन के स्थानीय भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा उन्हें इस मामले में एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा भूमि विवाद को लेकर एकजुट हो पाएगी या फिर इसी तरह आगे भी गुटों में बटकर काम करती रहेगी।