भाजपा के असंतुष्ट सांसद

वर्तमान लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अपनी आंतरिक कलह और राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के बाद पैदा हुए अनिश्चितता की स्थिति से बाहर नहीं निकल पा रहा। शेष दल संख्या की दृष्टि से इतने कमजोर हैं कि वह चाह कर भी मोदी सरकार पर दबाव नहीं बना सकते। विपक्षी दलों की कमजोर स्थिति को देखते हुए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उनकी संख्या को नजरअंदाज कर विपक्षी दलों की कही बात को सुना भी जाएगा और महत्त्व भी दिया जाएगा। विपक्षी दलों ने जो बात कहनी थी वह कह रहे हैं लेकिन अब भाजपा के ही सांसद भाजपा सरकार से असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। 

बिहार से चुनकर आए राजीव प्रताप रूडी और मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यटन विकास का काम नहीं होने का आरोप लगाया है। हेमा मानिली ने कहा कि पिछले पांच साल में उनके क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ा ऐसा कोई काम नहीं हुआ है, जिसका उल्लेख किया जा सके। मंत्री प्रह्लाद पटेल के बयान से रूडी न सिर्फ असंतुष्ट दिखे बल्कि यह भी जाहिर किया कि उनके अधिकारी ही उन्हें जानकारी नहीं दे रहे। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रूडी ने इको टूरिज्म और सोनपुर मेले का सवाल उठाया और कहा कि मंत्रालय अलग-अलग राज्यों में 500 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कर रहा है लेकिन बिहार में आज तक एक पैसा नहीं गया। राज्य सरकार से प्रस्ताव भी आया है, लेकिन पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं। जवाब में जब मंत्री पटेल ने कहा कि बिहार से कोई प्रस्ताव ही नहीं आया है तो थोड़े उग्र रूडी ने डीपीआर दिखाते हुए कहा, 'मैं डीपीआर सदन के पटल पर भी रख सकता हूं। अगर आपको नहीं बताया गया है तो अधिकारी के खिलाफ विशेषाधिकार का मामला बनता है। किसी तरह इस मामले को टाला गया। रूडी के तत्काल बाद हेमा मालिनी खड़ी हुई। उन्होंने कृष्णा सर्किट का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पांच साल पहले बौद्ध सर्किट के साथ ही कृष्णा सर्किट भी स्थापित किया गया था, लेकिन पिछले पांच साल में ऐसा कोई काम नहीं हुआ जिसका उल्लेख किया जा सके। मंत्री ने जवाब दिया कि कृष्णा सर्किट को दी गई पहली किश्त का आडिट चल रहा है। उसके बाद आगे का काम शुरू होगा। 

सांसद प्रताप रूडी और सांसद हेमा मालिनी ने जो मुद्दे उठाए हैं उन्हें सरकार को गंभीरतापूर्वक लेने की आवश्यकता है। बिहार का सोनपुर मेला विश्व विख्यात है। इसी तरह मथुरा का भारतीय संस्कृति व इतिहास में एक विशेष स्थान है। आजादी के बाद मथुरा का जितना विकास होना चाहिए था वह नहीं हुआ। अतीत की कांग्रेस की सरकारों ने केवल मथुरा ही नहीं अयोध्या और काशी सहित देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज के तमाम धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों की अनदेखी की और अल्पसंख्यक तृष्टिकरण की राह पर चलीं। 

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने का मुख्य कारण देश के बहुमत हिन्दू समाज का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति विश्वास है। मोदी की कथनी और करनी पर विश्वास करते हुए ही हिन्दू समाज ने पहले से अधिक सीटों पर भाजपा को विजय दिलवाई है। पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार से जहां देशवासी भारत को मजबूत होता देखना चाहते हैं, वहीं भारतीय इतिहास व संस्कृति में विशेष महत्व रखने वाले स्थानों का विकास भी देखना चाहते हैं। अयोध्या, काशी और मथुरा का सीधा संबंध देश के बहुमत हिन्दू समाज से है, लेकिन भारत के इतिहास व संस्कृति के यह अटूट अंग हैं। भारत की पहचान भी उसी के साथ जुड़ी है लेकिन धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इन स्थानों को नजरअंदाज किया गया। केवल इन्हीं को ही नहीं करीब-करीब सभी ऐसे स्थानों की अनदेखी की गई जिनके साथ हिन्दू समाज की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनके सहयोगियों से यह आशा की जाती है कि कम से कम वे देश के बहुमत समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन सभी स्थानों को बढ़ावा देंगे तथा उन परम्पराओं को मजबूत करने में भी सहायक होंगे जिनमें बहुमत हिन्दू समाज का विश्वास व आस्था है। सांसद राजीव प्रताप रूडी और हेमा मालिनी ने जो मांगें रखी हैं उसको पूरा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर अतीत की सरकारों की तरह ही मोदी सरकार ने बहुमत समाज की भावनाओं को सम्मान न दिया तो फिर भाजपा सांसदों में असंतोष बढ़ेगा जो पार्टी व सरकार के लिए हानिकारक ही साबित होगा।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।