बड़ी चिंताः कहीं मॉनसूनी बादलों को ही उड़ा न ले जाए 'वायु', उत्तर भारत में मच सकता है हाहाकार

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): चक्रवाती तूफान 'वायु' को लेकर देशभर में चिंता जताई जा रही है। कई राज्यों में सरकार ने अलर्ट जारी कर रखा है। तूफान के खतरे से बचाने के लिए तटवर्ती इलाकों को खाली करवाया जा रहा है, लेकिन उत्तर भारत में मॉनसून के देरी से पहुंचने की भविष्यवाणी करने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) को 'वायु' के चलते एक बड़ा डर सता रहा है कि कहीं यह मानसूनी बादलों को ही न ले उड़े। अगर ऐसा हुआ तो उत्तर भारत में बारिश की कमी से हाहाकार मच सकता है, क्योंकि पूरे मैदानी इलाकों में किसान खेती-बाड़ी के लिए मॉनसून की बारिश पर ही निर्भर होते हैं। वहीं, गर्मी लोगों को और बेहाल कर सकती है।

IMD के मुताबिक, चक्रवाती तूफान 'वायु' इस वक्त गुजरात की तरफ बढ़ रहा है। 12-13 जून को ये सौराष्ट्र तट पर दस्तक दे सकता है। अरब सागर में डिप्रेशन की स्थिति अगले कुछ घंटों में साइक्लोन (चक्रवाती तूफान) की शक्ल ले सकती है, जिसके चलते मौसम विभाग ने 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ भारी से भारी बारिश होने की चेतावनी दी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैसे तो मॉनसून पहले से ही देरी से चल रहा है, लेकिन अगर वो 80 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले वायु चक्रवात की चपेट में आ गया तो किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा। अगर मॉनसूनी बादल नहीं ठहरे तो बादल भी नहीं बरसेंगे। बादल नहीं बरसे तो उत्तर भारत में सूखे की स्थिति पैदा हो जाएगी।

IMD के अलर्ट के मुताबिक, 'वायु' तूफान के कारण अहमदाबाद, गांधीनगर और राजकोट समेत तटवर्ती इलाके वेरावल, भुज और सूरत में हल्की बारिश हो सकती है। चक्रवात के कारण सौराष्ट्र के भावनगर, अमरेली, सोमनाथ, वेरावल, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ समेत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है।

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप के अधिकांश हिस्सों और केरल और दक्षिण तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है। मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार तक दक्षिणी अरब सागर, लक्षद्वीप और केरल, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व व पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।