मोदी सरकार का बड़ा कदम, देश के किसानों को FPO के तहत मिलेंगे 15 लाख रुपए

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)-केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने 10,000 एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठनों (FPO- Farmer Producer Organisations) के गठन और संवर्धन के लिए नए दिशा-निर्देशों की बुकलेट जारी की। तोमर ने कहा, साल 2023-24 तक कुल 10,000 एफपीओ गठित होनी हैं। 5 साल के लिए हर एफपीओ को सहायता दी जाएगी। सरकार इस पर कुल 6,866.00 करोड़ रुपये खर्च करेगी। 


केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर  (Narendra Singh Tomar) का कहना है कि 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organization-FPO) बनने से किसानों की आमदनी तो बढ़ेगी ही साथ ही देश में विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे। उन्होंने कहा कि देश के 60 प्रतिशत किसानों के पास जोत का आकार छोटा है और वे छोटे व सीमांत किसान हैं, जो इन एफपीओ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। शुरुआत में एफपीओ में सदस्यों की न्यूनतम संख्या तराई इलाकों में 300 और उत्तर-पूर्व व पहाड़ी इलाकों में 100 रहेगी। मंत्री तोमर ने राज्‍यों को आश्‍वस्‍त किया कि राज्‍यों को आवश्‍यक मदद/सहायता दी जाएगी ताकि एफपीओ को बढ़ावा दिया जा सके एवं केसीसी के माध्‍यम से किसानों को दी गई ऋण सुविधाओं में वृद्धि की जा सके। 

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राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने बताया कि सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एफपीओ बनाने के लिए जाने माने अर्थशास्त्री डॉ वाईके अलघ के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। इसके तहत कम से 11 किसान संगठित होकर अपनी एग्रीकल्चर कंपनी या संगठन बना सकते हैं। मोदी सरकार जो 15 लाख रुपये देने की बात कर रही है उसका फायदा कंपनी का काम देखकर तीन साल में दिया जाएगा। एफपीओ यानी किसानी उत्पादक संगठन (कृषक उत्पादक कंपनी) किसानों का एक समूह होगा, जो कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां चलाएगा। एक समूह बनाकर आप कंपनी एक्ट में रजिस्टर्ड करवा सकते हैं।

नरेंद्र सिंह तोमर नहीं होंगे ...

एफपीओ का गठन और बढ़ावा देने के लिए अभी लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (Small Farmers’ Agri-Business Consortium) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development) काम कर रहे हैं। दोनों संस्थाओं के मिलाकर करीब पांच हजार एफपीओ रजिस्टर्ड हैं। मोदी सरकार इसे और बढ़ाना चाहती है, इसलिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को भी इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है।

एफपीओ का गठन और बढ़ावा देने के लिए अभी लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (Small Farmers' Agri-Business Consortium) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development) काम कर रहे हैं।