बेअंत सिंह हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से राजोआना की दया याचिका पर फैसले लेने के लिए दिया 6 हफ्ते का समय

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर फैसला करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि शीर्ष अदालत को मुद्दे पर राष्ट्रपति के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने न्यायाधीश ए. एस. बोपन्ना और वी. रामसुब्रमण्यम के साथ ही प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि राजोआना पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा है और दोषी ने संभवत: खालिस्तान के मुद्दे पर उनकी हत्या की थी। मेहता ने कहा कि सरकार ने राजोआना की याचिका पर नियत प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी, जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद फैसला लेंगे। उन्होंने इस तरह की परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में मामले में स्थगन की मांग की।

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जब पीठ ने पूछा कि क्या मेहता राष्ट्रपति द्वारा किसी निर्णय के लिए समय सीमा दे सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि वह सरकार से बात कर सकते हैं न कि राष्ट्रपति से। राजोआना की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की दया याचिका लगभग नौ साल से लंबित है और इस बात पर जोर दिया कि मामले को दो सप्ताह से अधिक स्थगित नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने पहले केंद्र के अनुरोध पर कई बार सुनवाई टाल दी थी। पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने राजोआना की दया याचिका पर फैसला करने के लिए केंद्र को आखिरी मौका दिया था।राजोआना ने हालांकि खुद दया याचिका दायर नहीं की है, मगर उनकी ओर से कई लोगों द्वारा कई दया याचिकाएं दायर की गई हैं। दलील दी गई है कि दोषी मौत की सजा के साथ 10 साल बिता चुका है, जो कि उसकी सजा को कम करने के लिए पर्याप्त है।

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शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा था कि वह संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को उसकी मौत की सजा के लिए राजोआना का प्रस्ताव कब भेजेगा। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को कुछ मामलों में क्षमा करने की शक्ति प्रदान करता है। शीर्ष अदालत ने नोट किया था कि पिछले साल 7 सितंबर को गृह मंत्रालय द्वारा पंजाब के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा गया था, ताकि यह सूचित किया जा सके कि राजोआना की मौत की सजा का प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।