बंगाल में बवाल

लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में बंगाल में हुए बवाल ने देश व दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। पश्चिमी बंगाल में हुए बवाल को लेकर चुनाव आयोग ने एक दिन पहले चुनाव प्रचार को रोक दिया वहीं वहां के गृह सचिव और एडीजी को भी बदल दिया। चुनाव आयोग ने उपरोक्त कार्रवाई संविधान की धारा 324 के अधीन की। इस धारा में चुनाव आयोग को ऐसे किसी मामले में दखल देने का अधिकार है, जहां उसे गड़बड़ी की आशंका हो। आयोग ने स्वीकार किया कि अगर प्रचार का समय दिया गया तो कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। चुनाव आयोग ने अपने फैसले के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अतीत में दिए तीन फैसलों का हवाला भी दिया।

चुनाव आयोग के उपरोक्त फैसले का विरोध करते हुए कांग्रेस ने कहा कि आयोग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों को देखते हुए ऐसा किया वहीं ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि 'मैंने आरएसएस के लोगों से भरा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। राज्य में कानून व्यवस्था की ऐसी कोई समस्या नहीं है जो अनुच्छेद 324 को लागू करना पड़े।' सातवें चरण में बंगाल की 9 सीटों पर चुनाव 19 मई को होने वाला है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो पर हुए हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2019 में ममता दीदी का पत्ता साफ होने जा रहा है। सत्ता के नशे में वह लोकतंत्र का गला घोंटने पर उतारू है। दीदी की बौखलाहट देखकर लगता है कि बंगाल हमें 300 सीटों का आंकड़ा पार करा देगा। दूसरी ओर हिंसा के खिलाफ दिल्ली में भाजपा नेताओं ने मौन विरोध-प्रदर्शन किया। बशीरहाट की रैली में मोदी ने कहा, दीदी की आंख पर अहंकार का चश्मा लगा है। उनको लगता था कि लोगों को डराकर राज करती रहेंगी लेकिन सत्ता जाने के डर से घबरा गई हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में हिंसा को लेकर कहा कि काफिले पर हमले के वक्त सीआरपीएफ न होती तो उनका बचना मुश्किल था। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने सहानुभूति पाने के लिए ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी। शाह ने उसे लेकर फोटो व वीडियो जारी किए।

गौरतलब है कि देशभर में हुए छ: चरणों के चुनावों में मात्र बंगाल में प्रत्येक चरण में हुई हिंसा को छोड़कर सब कुछ शांतिप्रिय ढंग से ही हुआ। हिंसा के पीछे मुख्य कारण ममता बनर्जी की हताशा ही है। छ: चरणों के मतदान के बाद बंगाल में अब एक ही प्रश्न उभर कर आ रहा है कि भाजपा को बंगाल में कितनी सीटें मिलने जा रही हैं। भाजपा अध्यक्ष आधी से अधिक सीटें जीतने का दावा कर चुके हैं। प. बंगाल से 42 लोकसभा सदस्य हैं। भाजपा ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की नीति पर निशाना साध कर आगे बढ़ती चली जा रही है। भाजपा की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार अब तक 33 सीटों पर हुए चुनाव में 19 सीटें जीत सकती है। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का जो वोट शेयर 17 प्रतिशत था, जो 2016 के विधानसभा चुनाव में 10 प्रतिशत पर आ गया, इसके बाद हुए चुनावों में यह 22 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस बार इसके 30 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। साफ है कि भाजपा को करीब 100 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिल सकती है। ऐसा होता है तो 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ममता के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। भाजपा का जो भी वोट शेयर बढ़ेगा वह कांग्रेस और लेफ्ट के वोट शिफ्ट होने की वजह से ही होगा।

बंगाल में बवाल का कारण तो उपरोक्त तथ्यों से समझा जा सकता है लेकिन इसके साथ-साथ एक और बात पर ध्यान देने की जरूरत है, वह है सात चरणों में चुनाव। इतने लम्बे समय तक चुनाव प्रक्रिया के होने के कारण ही चुनाव आयोग पर भी दबाव बढ़ता गया, राजनीतिक दलों तथा उनके नेताओं की परेशानियां भी बढ़ गईं और बोल भी बिगड़ गए। चुनाव आयोग ने जो कदम उठाए वह एक सीमा से आगे प्रभाव डालने में असफल रहे। भविष्य में इतने चरणों में चुनाव कराने पर भी चुनाव आयोग को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। धन, समय की बर्बादी, हिंसा इत्यादि पहलुओं पर विचार करने पर यही लगता है कि चुनाव जितने कम चरणों में हों वही बेहतर है।