Saturday, November 17, 2018 07:30 PM

घाटी में बवाल

कश्मीर घाटी में ईद पर आतंकियों ने पांच हमले करके तीन पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी। यह सभी पुलिसकर्मी ईद मनाने छुट्टी लेकर अपने-अपने घर आये थे। भाजपा के एक स्थानीय नेता की भी अपहरण करने बाद हत्या कर दी। इसके साथ ही अनंतनाग के अशिजीपुरा, जंगलत मंडी और बारामूला के सोपोर की ईदगाहों में उपद्रवियों ने आईएसआईएस के झंडे लहराए। ईदगाह के पास सुरक्षाबलों पर पथराव कर प्रदर्शन किया। बिजबहेड़ा में रेलवे स्टेशन के पास सीआरपीएफ की 30वीं बटालियन पर हमला कर आतंकी भाग गए। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। हिंसक झड़पों के कारण बडगाम-श्रीनगर-अनंतनाग-काजीगुंड-जम्मू मार्ग की ट्रेन सेवाएं स्थगित कर दी गईं। बारामूला और श्रीनगर-बडगाम मार्ग पर भी ट्रेनें नहीं चलीं। पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को भारत माता की जय बोलने पर बदसलूकी का सामना करना पड़ा। श्रीनगर की हजरतबल मस्जिद में नमाज अता करने पहुंचे फारुख का विरोध हुआ, उनसे धक्का-मुक्की की गई, उन पर जूते उछाले गए। इस दौरान फारुख चुपचाप बैठे रहे। विरोध बढऩे पर मस्जिद से चले गए। फारूक ने कहा कि अगर सिरफिरे लोगों को लगता है कि फारूक डर जाएगा तो यह उनकी गलती है। मुझे भारत माता की जय कहने से कोई नहीं रोक सकता। मैं डरा नहीं हूं। प्रदर्शनकारियों को नमाज के समय ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी। भारत आगे जा रहा है। कश्मीर को भी अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। गौरतलब है कि दो दिन पहले दिल्ली में आयोजित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में फारूक ने लोगों से भारत माता की जय के नारे लगवाए थे। 

घाटी में ईद पर जो कुछ हुआ उसके पीछे पाकिस्तान का नापाक हाथ ही है। ईद से पूर्व अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने सत्ता में आई इमरान खान की नई सरकार को कहा था कि वह आतंकवादी गुटों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई करें। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की दक्षिण-मध्य एशिया मामलों की अधिकारी एलिस वेल्स ने पाक सरकार को चेताते हुए नए पीएम इमरान खान के उस बयान की सराहना की है जिसमें उन्होंने देश की सीमा पर शांति के महत्व को स्वीकारा था। वेल्स ने कहा कि आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मिलना हमारे लिए चिंता का विषय है। जब उनसे पूछा गया कि क्या हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के खिलाफ पाक कार्रवाई की अमेरिकी मांग पर कोई प्रगति हुई है, उन्होंने अपील की कि पाक सरकार आतंकी संगठनों पर दबाव बढ़ाने के लिए और अधिक काम करे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की अधिकारी हिन्द महासागर में अमेरिकी नीति पर बोल रही थीं। 

इमरान खान की सरकार से आतंकियों विरुद्ध किसी ठोस कार्रवाई की आशा रखना ही गलत होगा, क्योंकि इमरान खान की पीठ पीछे तो पाक सेना का ही हाथ है। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार तो सेना के लिए एक लोकतांत्रिक चेहरा मात्र है, असल ताकत तो सेना प्रमुख बाजवा के हाथ ही है। इमरान तो केवल कठपुतली मात्र ही हैं। इमरान के गद्दीनशीन होने के कुछ घण्टों बाद ही पाक सेना ने सीमा पर गोलीबारी का कार्य रोकने की बजाए अधिक तेज कर दिया है।

कश्मीर घाटी को छोड़कर जम्मू-कश्मीर के दो क्षेत्र जम्मू और लेह लद्दाख शांतमय रहे। धारा 370 के साथ जुड़े 35-ए का मामला सर्वोच्च न्यायालय के पास है। सर्वोच्च न्यायालय पर दबाव डालने हेतु ही घाटी एक नहीं कई बार आतंकियों के कहने पर बंद रही है। घाटी में एक छोटा वर्ग पत्थरबाजी कर घाटी में हिंसा और भयमय माहौल बना देता है। मोदी सरकार ने पड़ोसी पाकिस्तान में नई बनी इमरान खान की सरकार को चिट्ठी लिख क्षेत्र में शांति बनाये रखने की बात कही है।

भारत का यह दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद पाकिस्तान एक पड़ोसी देश के रूप में भारत को मिला। पिछले सात दशक में भारत-पाकिस्तान के साथ चार लड़ाइयां लड़ चुका है, चारों में भारत का प्रदर्शन प्रभावपूर्ण ही रहा है। भारत के नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक के नेताओं ने पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ समय-समय पर बढ़ाया लेकिन पाकिस्तान इसे भारत की कमजोरी समझकर ठुकराता रहा। अब समय है कि आंतरिक स्तर पर जम्मू-कश्मीर में बैठे उस वर्ग को जो खाते तो भारत का है और गुणगान पाकिस्तान का करते हैं, उनके विरुद्ध देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया जाए। जो लोग हिंसा की राह पर चलकर देश की एकता व अखण्डता को चुनौती दे रहे हैं उनको उनकी भाषा में जवाब देकर चुप कराया जाना चाहिए। पाकिस्तान को पहले बातचीत द्वारा समझाने का प्रयास करना चाहिए। अगर वह नहीं समझता तो उसके विरुद्ध भी एक निर्णायक लड़ाई अपने समय और परिस्थितियों के अनुसार लड़ ही लेनी चाहिए।

पिछले 7 दशक में पाकिस्तान भारत को हर स्तर पर हर क्षेत्र में एक नकारात्मक चुनौती देता रहा है। भारत अपने पड़ोसी की नापाक हरकतों को केवल इसीलिए बर्दाश्त करता रहा और कर भी रहा है क्योंकि भारत शांति और विकास की राह पर चल रहा है और इसमें विश्वास भी रखता है। भारत और पाकिस्तान की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां बताती हैं कि एक सकारात्मक और नकारात्मक राह पर चलने वाले देशों में कितना अंतर है पाकिस्तान जितनी जल्दी नकारात्मक सोच और राह को छोड़ेगा उतना ही उसके लिए बेहतर रहेगा। अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता तो भविष्य में वह अपने आंतरिक दबाव को भी संभालने में असफल रहेगा और चीन उसको अपनी कठपुतली बना अवश्य इस्तेमाल करेगा। ऐसी स्थिति आने के संकेत तो अभी से मिलने लगे हैं। पाकिस्तान अभी संभल जाए तो अच्छा है नहीं तो अंधकारमय भविष्य के लिए तैयार रहे। घाटी में भविष्य में बवाल न हो इसके लिए वहां कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है तथा भारत माता की जय कहने वाले फारुख अब्दुल्ला के साथ खड़े होकर भारत माता की जय की आवाज को बुलंद करने की आवश्यकता है। 

इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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