'सिख फॉर जस्टिस' पर प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने न्यूयॉर्क  से संचालित खालिस्तान समर्थक समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) पर प्रतिबंध लगा दिया। यह कार्रवाई समूह की देश विरोधी गतिविधियों के कारण की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन आदि देशों के कुछ कट्टरपंथी सिखों द्वारा संचालित समूह पर अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर यूएपीए कानून 1967 की धारा 3 (1) के तहत कार्रवाई की है। 

सूत्रों के मुताबिक एसएफजे के कर्ताधर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत-इंग्लैंड मैच दौरान देखा गया था। समूह के 10 और कार्यकर्ताओं की पहचान की गई है। भारतीय एजेंसियों ने इस समूह पर 11 केस दर्ज किए हैं और इसका समर्थन करने वाले कई सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए हैं। एसएफजे और इसके एजेंडे 'रेफरेंडम 2020' को पाकिस्तान से मदद मिल रही थी। इसकी वेबसाइट कराची स्थित एसएफजे कार्यकर्ताओं की वेबसाइट से सामग्री साझा कर रही थी और उसी सेे जुड़ी थी। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर 14 जुलाई को होने वाली पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बैठक में भारत इस मुद्दे को उठा सकता है। यह समूह करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बहाने पाकिस्तान से संपर्क में था। आईएसआई सिख फॉर जस्टिस समेत ऐेसे संगठनों को मदद देकर लंबे समय से खालिस्तान आंदोलन को हवा देने की साजिश रच रहा है। एसएफजे पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से दुनिया भर के सिख युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहा है। यह रेफरेंडम-2020 के माध्यम से देश-विदेश में बैठे सिखों से यह जानना चाहता है कि अलग पंजाब के बारे में वे क्या सोचते हैं? एसएफजे कई वर्षों से इसके जरिये अलग सिख राज्य की मांग को हवा दे रहा है। यह अमेरिका में बैठे एसएफजे के संस्थापक एडवोकेट गुरपतवंत सिंह पन्नू के दिमाग की उपज है।

भारतीय एजेंसियों को शक है कि आईएसआई इन अलगाववादी गुटों की मदद से पंजाब में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की फिराक में है। पाकिस्तान में अब भी कई खालिस्तानी समर्थित आतंकी गुट मौजूद हैं और आईएसआई सिख फॉर जस्टिस की मदद से सिख युवकों का ब्रेनवाश कर भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। एसजेएफ का कहना है कि उसका मकसद खालिस्तान की मांग को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाना है।  केन्द्र सरकार द्वारा उठाए गए उपरोक्त कदम का स्वागत करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत विरोध अलगाववादी कार्रवाई के खिलाफ यह उचित कदम उठाया गया है। इस संगठन से एक आतंकवादी संगठन के तौर पर सलूक किए जाने की जरूरत है लेकिन केंद्र सरकार ने कम से कम यह फैसला तो लिया। इस संगठन ने हाल के दो साल के दौरान पंजाब में खुलकर दहशत की लहर चलाई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संगठन अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका समेत कई देशों में फैला हुआ है। बीते तीन वर्षों में पकड़े गए एसएफजे समर्थकों से मिले हथियारों और गोला-बारूद से कई देशों में फैले नेटवर्क की बात सामने आई है। संगठन गैरकानूनी गतिविधियों के लिए पैसे की व्यवस्था हवाला या एमटीटीएस जैसे मनी ट्रांसफर चैनलों का इस्तेमाल करता रहा है। एसएफजे और कश्मीरी अलगाववादियों के बीच मजबूत गठजोड़ भी सामने आया है, जो पंजाब के अलावा पूरे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अब तक जो कुछ भी सामने आया है, वह बहुत मामूली है। एसएफजे राष्ट्रीय अखंडता खासकर पंजाब की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

कैप्टन ने कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई के समर्थन से 2014 में सिख मैमोरेंडम 2020 की साजिश शुरू की गई थी। एसएफजे की गैर कानूनी गतिविधियों ने देश को बड़ी चुनौती दी है। हाल के वर्षों के दौरान एसएफजे ने पंजाब में आगजनी और हिंसा की गतिविधियों करवाने के लिए कुछ गरीब और भोले भाले नौजवानों को फंड मुहैया कराया था। इस संगठन ने पंजाब में गैंगस्टरों पर और गरमख्यालियों का समर्थन प्राप्त करने की अनेक कोशिशें कीं और उन्हें भारत सरकार से पंजाब की आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया। कैप्टन ने कहा, भारत को अस्थिर करने के लिए एसएफजे को जो भी देश अपनी जमीन देगा, उसे भी इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे। एसएफजे भारत से बाहर भी लगातार मजबूती हासिल करने की, कोशिश कर रहा है। इसका खुलासा 30 जून, 2019 की घटना से हुआ है, जब इंग्लैंड में सक्रिय एसएफजे के कार्यकर्ताओं ने एजबेस्टन (बर्मिंघम) में भारत और इंग्लैंड के बीच विश्व कप क्रिकेट मैच के मौके पर भारत विरोधी प्रदर्शन किया। इस मौके पर पम्पा और उसके जोड़ीदार को मैमोरेंडम 2020 की टी-शर्ट पहने देखा गया और यह क्रिकेट मैच के दौरान खालिस्तान का झंडा फहरा रहे थे। बीते सप्ताह एसएफजे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर भी अपलोड किया जो पूरी तरह अलगाववाद को हवा दे रहा था। मुख्यमंत्री का कहना है कि एसएफजे ने प्रदेश सरकार के विरूद्ध पंजाब पुलिस के कर्मचारियों को बगावत करने के लिए उकसाने की कोशिश की थी। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री, जेल मंत्री, पूर्व व मौजूदा डीजीपी समेत पंजाब के सीनियर पुलिस अधिकारियों को भयभीत करने के लिए धमकियां भी दी गईं। इस संगठन ने सोशल मीडिया पर चलाई अपनी मुहिम के तहत सिख फौजियों को अपना निशाना बनाया और उन्हें फौज छोडऩे व मेमोरेंडम 2020 के लिए काम करने के लिए उकसाया था। पंजाब में अलगाववाद और आतंकवाद को एक बार फिर हवा देने के लिए अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा तथा पाकिस्तान में बैठे सिख फॉर जस्टिस के सदस्य पिछले कुछ वर्षों से काफी सक्रिय हैं और पाकिस्तान से समर्थन पाकर भारत विरुद्ध काफी कुछ कह व कर रहे हैं। सिख फॉर जस्टिस द्वारा किए प्रचार को पाकिस्तान के मीडिया में भी काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। पीएसजीपीसी के महासचिव व खालिस्तान समर्थक गोपाल चावला ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पाकिस्तानी टीवी की एक एंकर ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद के हालत को खालिस्तानी मूवमेंट के साथ जोड़ कर सिखों को भड़काने का प्रयास कर रही है। इस वीडियो में एंकर भारत को एक बार फिर टुकड़े-टुकड़े होने का खतरा बताते हुए मैनचेस्टर में खालिस्तानियों की ओर से लगाए गए नारे का उल्लेख करती है। इस महिला एंकर ने रेफरेंडम-2020 का जिक्र करते हुए कहा कि सिखों ने भारत से आजादी की मांग एक बार फिर शुरू कर दी है। पाकिस्तान स्थित गुरूद्वारा साहिबान के रखरखाव में किए जा रहे सुधारों का शोर मचा कर भी सिखों कि हमदर्दी लेने का प्रयास पाकिस्तान कर रहा है। उल्लेखनीय है कि बीती बैशाखी के अवसर पर सिख फॉर जस्टिस के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू ने गुरूद्वारा ननकाना साहिब में रेफरेंडम-2020 कि भर्ती के लिए एक सदस्यता अभियान शुरू करने के प्रयास भी किए थे। भारत सरकार के दबाव के बाद पाकिस्तान सरकार ने पन्नू को इस कैंप को लगाने कि आज्ञा नहीं दी थी।पंजाब व कश्मीर या देश के अन्य भागों में हो रही हिंसक वारदातें या अलगाव तथा आतंक की विचारधारा को विदेशों में मिल रहा समर्थन व संरक्षण दर्शाता है कि भारत के बढ़ते कदमों और बढ़ते कद को देखकर विश्व के कई विकसित देशों के साथ-साथ कट्टरवादियों को लगता है कि अगर भारत की राह में बाधाएं खड़ी करके भारत को रोका न गया तो आने वाले दिनों में भारत को एक महाशक्ति के रूप में रोकना उनके लिए मुश्किल होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक राष्ट्र के रूप में मजबूत हो रहा है। विश्व मंच पर भी अपनी एक अलग सकारात्मक पहचान बनाने में सफल हो रहा है। भारत के बढ़ते कदमों से भयभीत भारत विरोधी शक्तियां, आतंकवादियों और अलगाववादियों के कंधे पर बंदूक रख गोली चलाने की कोशिश कर रही हैं। भारत ने भारत विरोधियों के नापाक इरादे को समझते हुए ही 'सिख फॉर जस्टिस' जैसे भारत विरोधी संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रहित में उठाया गया यह एक मजबूत कदम है और स्वागत योग्य है।

इरविन खन्ना,  मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।