बादल जत्थेदारों को अपने सरकारी निवास पर तलब करने का मकसद बताएं : बाजवा

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): पंजाब के ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिन्दर बाजवा ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सितम्बर 2015 में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी दिये जाने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह और उनके सहयोगियों को अपने सरकारी निवास पर किस मकसद के लिए तलब किया था।

बाजवा ने आज यहां कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं की यह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उस समय यह बात चर्चा में रही कि बादल ने डेरा प्रमुख को माफी दिलाने के लिए अकाल तख्त और अन्य तख्तों के जत्थेदार साहिबान को अपने सरकारी निवास पर तलब किया था। यह बात बादल को ख़ुद बतानी चाहिए। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2007 में गुरु गोबिंद सिंह की वेशभूषा धारण करने के मामले में अकाल तख्त ने डेरा प्रमुख के सामाजिक बायकॉट का हुक्म दिया था और वर्ष 2015 में डेरा मुखी को माफ कर दिया गया था । सिखों में भारी रोष के कारण कुछ दिन बाद यह माफी वापस ले ली गई थी। इस बात को लेकर खासकर बादल परिवार के विरुद्ध नाराजगी आज भी जारी है। बाजवा ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ साहिब के पन्ने गलियों में बिखेरने के किये गए घृणित कार्य के बाद भी दोषियों की गिरफ्तारी के प्रयास नहीं किये गए। इन दोषियों को पकडऩे के लिये कैप्टन सरकार गंभीर प्रयास कर रही है । बाजवा ने बादल के इस आरोप को घबराहट और डर की निशानी बताया कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से ही लिखी जानी है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच टीम में बहुत ही माहिर, योग्य और निष्पक्ष अधिकारी शामिल किये गए हैं जो अपना काम बिना किसी के हस्तक्षेप से बहुत ही सूझ-बूझ के साथ कर रहे हैं।
 

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