बादलों की सुरक्षा

जानकारी के अनुसार पंजाब पुलिस के एडीजीपी (सुरक्षा) की ओर से वित्त विभाग को भेजे प्रस्ताव में कहा गया था कि सियासी लोगों, पूर्व पुलिस अधिकारियों और धार्मिक नेताओं की सुरक्षा में तैनात 187 वाहनों में से 118 कंडम हो चुके हैं। ऐसे में पुलिस विभाग को इसके लिए 36 जिप्सियों और दो फॉच्र्यूनर गाडिय़ों की जरूरत है। इसके जवाब में वित्त विभाग ने सरकारी खजाने की खराब हालत का हवाला दिया है। इसके साथ ही वित्त विभाग ने यह भी कहा है कि ऐसे कई लोग हैं वर्तमान में जो किसी सार्वजनिक या सरकारी पद पर तैनात नहीं हैं, उनके सरकारी वाहन और तेल का खर्च सरकारी खजाने पर डाला जा रहा है। ऐसे लोगों को सरकारी वाहन और सुरक्षा वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाने चाहिए। अगर किसी व्यक्ति विशेष को सुरक्षा देना आवश्यक है तो इसके बारे में फैसला उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि नई खरीदी जाने वाली एक फॉच्र्यूनर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष श्वेत मलिक को दी जानी थी। वहीं दूसरी पूर्व सीएम के सुरक्षा दस्ते से जोड़ी जानी थी क्योंकि उनके पास इस समय तैनात मोंटेरो भी कंडम करार दिए जाने के मानकों पर पहुंच चुकी है। वित्त विभाग का कहना है कि जिन लोगों की सुरक्षा के लिए यह खरीद का प्रस्ताव भेजा गया है, वे आर्थिक तौर पर संपन्न हैं और अपनी सुरक्षा के लिए इस तरह के खर्च उठाने में सक्षम हैं।
पंजाब वित्त विभाग द्वारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री तथा अन्य नेताओं और उन लोगों की सुरक्षा जो आतंकियों के निशाने पर हैं का केवल वित्तीय कारण बताकर नये वाहन न देना और यह कहना कि वह स्वयं सक्षम है गलत है। इस आधार पर तो वर्तमान मुख्यमंत्री व मंत्रियों सहित विधायक तक अपने वाहन लेने में सक्षम हैं। क्या वित्तीय कारण बताकर उनसे सरकारी वाहन व सुरक्षा वापस ली जा सकती है।
कानून व्यवस्था बनाये रखना प्रदेश सरकार की जिम्मेवारी है। केवल वित्तीय कारण बताकर किसी की सुरक्षा को खतरे में डालना उचित नहीं है। पंजाब सरकार को वित्त मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय पर पुन: विचार कर उचित कदम उठाना चाहिए। वित्त विभाग का दृष्टिकोण व्यवहारिक नहीं है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।