बाबा रामदेव मामले की सुनवाई अब 11 फरवरी को

हिसार (उत्तम हिन्दू न्यूज): योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा लखनऊ में 25 अप्रैल 2014 को दलितों के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुनवाई अब 11 फरवरी को होगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार जैन की अदालत में आज यहां सुनवाई हुई। स्वामी रामदेव की तरफ से स्वामी रामदेव के वकील लाल बहादुर खोवाल ने उनका पक्ष रखते हुए कहा कि इन धाराओं में केस डालने से पहले शिकायतकर्ता को धारा 196 सीआरपीसी के तहत सरकार से अनुमति लेनी होती है, लेकिन इस केस में सरकार से अनुमति नहीं ली गई, इसलिए शिकायत खारिज की जाए। 

शिकायतकर्ता रजत कल्सन ने अदालत को बताया कि इस मामले को एससी एसटी एक्ट के तहत स्थापित विशेष अदालत में स्थानांतरित कराने के लिए उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरूण कुमार सिंगल की अदालत में ट्रांसफर याचिका दायर की है।इस पर न्यायाधीश ने बाबा रामदेव व उनके अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस ट्रांसफर याचिका पर 23 फरवरी को सुनवाई होनी है। शिकायतकर्ता रजत कल्सन ने ट्रांसफर पिटिशन पर जारी आदेश की प्रति आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार जैन की अदालत में प्रस्तुत की जिसके आधार पर अदालत ने मामले की सुनवाई 11 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। 

इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता ने अदालत में एक याचिका दायर की जिसमें उन्होंने अपने केस में से धारा 153, 153 ए 153 बी व धारा 295ए हटाने की प्रार्थना की है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता कल्सन ने कहा कि इन धाराओं में किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है, क्योंकि बाबा रामदेव केन्द्र व प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी के कट्टर समर्थक हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद नहीं है कि केंद्र या राज्य सरकार उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति देगी। 

इस याचिका पर भी अब 11 फरवरी को सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि कोर्ट में दायर मामले के अनुसार बाबा रामदेव पर आरोप है कि उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र आने पर कहा था कि राहुल गांधी हनीमून तथा पिकनिक के लिए दलितों के घर जाते हैं।