माननीयों की हाजिरी

संसद में सांसदों की हाजिरी समय के साथ कम होती जा रही है। पिछले वर्ष हुये संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान साधारणतया 100 के करीब सांसदों की उपस्थिति रही। लोकसभा सचिवालय के हाजिरी रजिस्टर अनुसार पिछले शीतकालीन सत्र 2018 के पहले दिन ही 205 सांसद सदन से गैर हाजिर रहे। उसके बाद  क्रमश: 185, 163, 199, 190, 138, 139 और 146  सांसद सदन से गैरहाजिर थे। खासबात यह है कि लोकसभा से तीन तलाक बिल पारित करने पर भाजपा के ह्विप के बावजूद एनडीए के मात्र 245 सांसद ही मतदान करने आए। जबकि सरकारी पक्ष में 300 से ज्यादा सांसद हैं।

बहरहाल, लोकसभा में वरिष्ठतम सांसदों में शामिल लालकृष्ण आडवाणी सभी 8 दिन और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा 7 दिन सदन में उपस्थित रहे। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी 7, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2, कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जन खडग़े 7 व हेमा मालिनी 2 दिन ही उपस्थित रहे।

जहां तक विधायकों की स्थिति है उनकी कारगुजारी विशेषतया छोटे प्रदेशों में सांसदों से भी बुरी है। प्रदेश विधान सभाएं एक से दो महीने के बीच ही कार्य करती हैं। गौरतलब है सांसदों और विधायकों को मोटी रकम वेतन व भत्ते के रूप में मिलती है।

विधानसभा सचिवालय की तरफ से राइट ऑफ इनफार्मेशन एक्ट के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक पंजाब राज्य विधानमंडल मैंबर्स (पैंशन और डाक्टरी सुविधा विनियम) एक्ट-1977 और पंजाब राज्य विधानमंडल मैंबर्स (पैंशन और डॉक्टरी सुविधा विनियम) नियम-1984 की धारा 3;1 के तहत विधायकों की पैंशन निश्चित की जाती है। पंजाब सरकार की ओर से 26 अक्तूबर, 2016 को पैंशन में किए गए विस्तार के चलते प्रत्येक पूर्व विधायक को पहली टर्म के लिए 15 हजार रुपए बेसिक सैलरी, 50 प्रतिशत डी. ए. और 234 प्रतिशत महंगाई भत्ते अनुसार बनती पैंशन दी जाती है।

एक से ज्यादा बार विधायक बनने वालों को प्रति टर्म 10 हजार रुपए प्रति महीना बेसिक सैलरी सहित दूसरे भत्ते अलग से दिए जाते हैं। इस लिहाज से 2 बार विधायक बनने वाला व्यक्ति 1 लाख25 हजार रुपए और 3 बार विधायक बनने वाला 1 लाख 75,000 रुपए प्रति महीना पैंशन का हकदार बनता है।

इसी तरह 4 बार विधायक बनने वालों को 2 लाख 25,000, 5 बार के पूर्व विधायक को 2 लाख 75,000, 6 बार के विधायक को 3 लाख 25,000 रुपए, 7 बार विधायक बनने वाले को 3.75 लाख रुपए, 8 बार विधायक बनने वाले को 4.25 लाख रुपए और 9वीं बार विधायक बनने वाले को 4.75 लाख रुपए पैंशन मिलती है। इसके अलावा जब कभी पैंशन में विस्तार होगा तो यह पैंशन और बढ़ेगी।

91वर्षीय लाल कृष्ण अडवाणी की संसद में हाजिरी को लेकर जो तथ्य सामने आये हैं वह इस प्रकार हैं-आडवाणी पिछले 5 साल शांत ही रहे हैं। 91 साल के आडवाणी पिछले 5 साल हमेशा की तरह लोकसभा में आगे की सीट पर ही बैठते रहे और गिने चुने दिन ही संसद में नहीं पहुंच सके। 16वीं लोकसभा में आडवाणी की उपस्थिति 92 प्रतिशत रही है, पर लगभग न के बराबर बोले। वह 5 साल में 296 दिन मौजूद रहे, पर सिर्फ 365 शब्द ही बोले। इस लिहाज से वह 16वीं लोकसभा (2014-19) में 15वीं लोकसभा (2009-1) से करीब 99 फीसदी कम बोले हैं। 15वीं लोकसभा के दौरान आडवाणी ने 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया था और करीब 35,926 शब्द बोले थे। पिछले पांच साल में आडवाणी ने सिर्फ 5 बार लोकसभा में हुई चर्चाओं और कार्यवाहियों में सिर्फ 5 बार हिस्सा लिया, जबकि 2009 से 2014 के दौरान उन्होंने 42 बार हिस्सा लिया था। इस दौरान वह 3 मिनट से भी कम बोले हैं।

लालकृष्ण आडवाणी, प्रकाश सिंह बादल, वीरभद्र सहित देश में कई और वरिष्ठ नेता हैं जिनका सम्बंध अलग-अलग राजनीतिक दलों से उनको अपनी आयु को देखते हुये सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को मौका मिल सके। ऐसे वरिष्ठ नेता अपनी पारी खेल चुके हैं इसलिये अब उन्हें युवाओं को अवसर देना चाहिए। जीवन की संध्या के लिये उन्हें अच्छी खासी पैंशन तो मिल ही रही है मान-सम्मान के साथ विदाई लेने में ही भलाई है। माननीयों को चाहिये कि वह मिल रहे वेतन और भत्तों के साथ लोगों के प्रति अपनी जिम्मेवारी को समझते हुए लोकसेवा के लिये अधिक समय निकाल सक्रिय हों। इसी में प्रदेश व देश की भलाई है। राजनीतिक दलों को भी सुनिश्चित करना चाहिये कि वह माननीयों को संसद और विधानसभा में अधिक हाजिरी दें। गैर हाजिरी से समय और धन जनता का ही बर्बाद होता है।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।